Author: Sanjay Dubey

धुरंधर: फिल्म बड़ी नहीं लंबी होनी चाहिएआनंद फिल्म का एक सदाबहार डायलॉग है “बाबू मोशाय जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होना चाहिए़”। देश दुनियां में फिल्मे भी फेंटेसी जिंदगी है।कल्पनालोक में विचरने के लिए मजबूर कर देने वाली फिल्मे मनोरंजन का सबसे सशक्त माध्यम है। हिंदुस्तान में 1896 से फिल्मों का प्रदर्शन हो रहा है। 7 जुलाई 1896 को ल्यूमिनर बंधुओं ने एक रुपए की टिकट में फिल्म दिखाया था। 21 अप्रैल 2013 को मूक फिल्म “राजा हरिश्चंद्र” और 14 मार्च 1931 को बोलती फिल्म आलम आरा ने नये युग की शुरूआत की। ल्यूमिनर बंधुओं ने जो फिल्म दिखाई थी उसका…

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वो कौन सी गायिका है जिनके हिस्से में एक ही फिल्म में 71 गाने आए? स्वर कोकिला लता मंगेशकर के हिस्से में अनगिनत गाने है।अनेक ऐसी फिल्मे है जिसमें महिला स्वर में जितने भी गाने है लता मंगेशकर ने गाया है। फिल्म में लता मंगेशकर ने सर्वाधिक गाने गाये है लेकिन भारतीय फिल्म इतिहास में एक ही फिल्म में सर्वाधिक गाने का रिकॉर्ड जद्दन बाई के नाम पर है।1932 में एक फिल्म आई – इंद्रसभा। ये फिल्म पद्य में बनी फिल्म थी याने संवाद में गद्य नहीं था। फिल्म में जितने पात्र थे वे सब गायन के रूप में ही…

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1983 विश्व कप के एक नायक:मदन लाल बनाम मदद लाल हिंदुस्तान क्रिकेट के सफर में अगर मील का पत्थर का देखे तो 1983 का साल ऐसा साल रहा जहां से क्रिकेट खेलने वाले देशों ने माना कि प्रतिभा हिंदुस्तान में भी है। ये साल कपिलदेव की उस टीम का साल था जिसने वेस्ट इंडीज टीम के वनडे विश्वविजेता होने के हैट्रिक को रोका था। टीम खेल में व्यक्तिगत प्रतिभाएं भी ऐसी होती है जो जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 1983 के विश्व विजेता हिंदुस्तान की टीम में मदनलाल ऐसे खिलाडी रहे जिन्होंने पहले जिम्बाब्वे फिर ऑस्ट्रेलिया और अंत में…

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शानदार जीत,शानदार आगाज़2007,2025 के बाद 2026 में भी भारतीय क्रिकेट टीम ने हैट्रिक जीत हासिल कर लिया।महेंद्र सिंह धोनी,रोहित शर्मा के बाद सूर्य कुमार यादव तीसरे ऐसे कप्तान बन गए है जो क्रिकेट के फटाफट फॉर्मेट में अपनी टीम को विजेता बनाए है। इस टूर्नामेंट में अगर कोई खिलाड़ी अपने असफलता के दौर से निकलकर सफलता के झंडे गाड़े है तो वे दो खिलाड़ी संजू सैम्सन और ईशान किशन है। दोनों खिलाड़ी पिछले कई महीनों से सफलता की तलाश में थे। कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्य कुमार यादव के भरोसे ने दोनों खिलाड़ियों को मौका दिया और जब पूरी…

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शानदार जीत,शानदार आगाज़2007,2025 के बाद 2026 में भी भारतीय क्रिकेट टीम ने हैट्रिक जीत हासिल कर लिया।महेंद्र सिंह धोनी,रोहित शर्मा के बाद सूर्य कुमार यादव तीसरे ऐसे कप्तान बन गए है जो क्रिकेट के फटाफट फॉर्मेट में अपनी टीम को विजेता बनाए है। इस टूर्नामेंट में अगर कोई खिलाड़ी अपने असफलता के दौर से निकलकर सफलता के झंडे गाड़े है तो वे दो खिलाड़ी संजू सैम्सन और ईशान किशन है। दोनों खिलाड़ी पिछले कई महीनों से सफलता की तलाश में थे। कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्य कुमार यादव के भरोसे ने दोनों खिलाड़ियों को मौका दिया और जब पूरी…

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100साल का राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ देश में राष्ट्रीय दल के रूप में तीन ही ऐसी पार्टी रही है जिनके प्रधानमंत्रियों ने देश में राज किया। कांग्रेस के प्रधान मंत्रियों की फेरहिस्त लंबी है। भारतीय जनता पार्टी के दो और जनता पार्टी के एक प्रधान मंत्री के हिस्से में ये उपलब्धि है। हर राजनैतिक दल की एक स्थाई विचारधारा होती है जिसके आधार पर वे जनता से सत्ता के लिए वोट मांगते है।कांग्रेस के थिंक टैंक में गांधीवादी विचारधारा का प्रभाव देखने को मिलता है।कहा जा सकता है कि कांग्रेस के पीछे गांधी खड़े है। जनसंघ जो अब स्पष्ट रूप…

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एक भाषा के रूप में हिंदी न सिर्फ भारत की पहचान है, बल्कि हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति और संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा होने के साथ हिंदी विश्व की संभवतः सबसे वैज्ञानिक भाषा है, जिसे दुनिया भर में समझने, बोलने और चाहने वाले लोग बहुत बड़ी संख्या में मौजूद हैं। यह विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जो हमारे पांरपरिक ज्ञान, प्राचीन सभ्‍यता और आधुनिक प्रगति के बीच एक सेतु भी है। हिंदी भारत संघ की राजभाषा होने के साथ ही ग्यारह राज्यों और तीन संघ…

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विराट व्यक्तित्व – भगतसिंहभगत सिंह, नाम सुनते ही एक विराट व्यक्तित्व आंखों के सामने खड़ा हो जाता है।ये व्यक्तित्व निर्भीकता का परिचायक है। बेखौफ जीवन जीने और दुश्मनों की नींद हराम कर देने वाले युवा थे भगत सिंह। जिस दौर में भगत सिंह ने अपनी जान देश के लिए कुर्बान कर दिया उस उम्र में अधिकांश युवा अपने निहित स्वार्थ के लिए पैसे कमाने के लिए रोजगार ढूंढते है। उस जमाने में भगत सिंह के उम्र के सामान्य लोग परिवार बसाने के लिए भी तत्पर रहते थे। स्वयं भगत सिंह की भी शादी होने वाली थी लेकिन उन्होंने। मातृभूमि की…

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क्या हम कठिनतम जिंदगी को जीने पर मजबूर होते जा रहे है? भूत वर्तमान और भविष्य, तीन शब्दों में जिंदगी चलती है। लाखों करोड़ो लोगों का कहना है कि व्यक्ति को वर्तमान में जीना चाहिए। ये भी कहा जाता है कि अतीत से सीखना चाहिए और अनुभव का फायदा उठाकर जिंदगी को खुशहाल बनाना चाहिए। आप अपने स्वयं से पूछिए कि आप अतीत से क्या सीखते है? कहने के लिए कुछ भी हो लेकिन सच ये है कि हम अतीत से सुख का टोकना लेने के बजाय दुख का पिटारा लेकर वर्तमान में जीते है। सबसे कठिन स्थिति तब होती…

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मोहनलाल, 2025 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार विजेतादेश के एक सौ पैतालीस करोड़ दर्शकों के लिए विभिन्न भाषा में दीर्घ काल मनोरंजन करने वालो को फिल्म पुरुष पुरोधा दादा साहेब फाल्के के नाम पर राष्ट्रीय पुरस्कार1969से देने की परंपरा भारत सरकार ने शुरू किया।इस साल मलयालम फिल्म के मशहूर अभिनेता मोहनलाल को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया है।दक्षिण की फिल्मों में अभिनय करने वाले नायकों की एक बात मुझे हमेशा अच्छी लगती है कि वे अपना असली नाम के बदले चलताऊ नाम नहीं रखते। अब मोहन लाल को ही ले लीजिए ये नाम पहले स्ट्रोक में महात्मा गांधी…

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