शाबाश हरमन प्रीत कौर राष्ट्रपति भवन में देश के सर्वाधिक सम्मानित नागरिक अलंकरण समारोह में अगर सबसे ज्यादा तालियां किस व्यक्तित्व के लिए बजी? ये देखा जाए तो भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान और विश्व विजेता टीम की नेतृत्वकर्ता हरमन प्रीत कौर के लिए बजी। श्रम को सम्मान मिले तो श्रम बिंदुओं की चमक और भी बढ़ जाती है।हरमन प्रीत कौर की मुस्कान भी यही बया कर रही थी, पद्मश्री पुरस्कार ग्रहण करते समय। हिंदुस्तान में पुरुषों ने क्रिकेट उन्नीस सौ बत्तीस के साल से खेलना शुरू कर दिया था। महिलाओं को चौवालीस साल बाद उन्नीस सौ छिहत्तर में पहला टेस्ट खेलने को मिला। महिलाओं की क्रिकेट टीम के पास न तो पर्याप्त संसाधन हुआ करते थे और न ही पीछे कुशल प्रबंधन था। टीम की उपलब्धि कम व्यक्तिगत प्रदर्शन के बल पर उंगलियों में गिनने लायक खिलाड़ी थी। साठ साल के इतिहास को उठा कर देखे तो केवल एक महिला शांता रंगास्वामी को पद्म भूषण और चार महिलाओं को पद्मश्री पुरस्कार मिला है।

पद्म विभूषण पुरस्कार किसी भी महिला क्रिकेटर्स को नहीं मिला है पुरुष क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर के लिए तो भारत रत्न पुरस्कार के नियम संशोधित हो गए थे। पुरुषों में सचिन तेंदुलकर को पद्मविभूषण और पद्मश्री पुरस्कार भी मिला है। ग्यारह पुरुष क्रिकेटर्स को पद्म भूषण पुरस्कार मिला है। महिला क्रिकेट खिलाड़ियों में डायना इन्दुलज़ी को दो हजार दो के साल में पद्म श्री पुरस्कार मिला था। महिला क्रिकेट का ये पहला नागरिक अलंकरण पुरस्कार था। डायना के बाद दो हजार बारह में झूलन गोस्वामी दूसरी महिला खिलाड़ी बनी जिन्हें पद्मश्री मिला। मिताली राज दूसरी महिला खिलाड़ी है जिन्हें दो हजार इक्कीस में पद्म श्री पुरस्कार मिला। तीसरा पद्म श्री झूलन गोस्वामी को दो हजार बाईस में मिला था। दो हजार छब्बीस का साल हरमन प्रीत कौर का है। उनके नेतृत्व में भारत ने दो हजार पच्चीस का विश्वकप जीता है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम पूर्व में दो बार विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी लेकिन विजेता नहीं बन पाई थी। हरमन प्रीत कौर ने मिथक को तोड़ा और दक्षिण अफ्रीका के अंतिम खिलाड़ी को कैच आउट कर अविस्मरणीय मैच बना दिया। हरमन प्रीत कौर के नेतृत्व में विजयी टीम के चलते महिलाओं में खेल के पार्टी वैसा ही रुझान देखने को मिल रहा है जैसे कपिल देव के द्वारा उन्नीस सौ त्रियासी में विश्व कप जीतने के बाद पुरुषों में देखने को मिला था।
