Author: Sanjay Dubey

अधिकार की सम्पन्नता ही सजगता हैदुनियां भर में मानव के विरुद्ध शोषण करने वाले देशों ने ही 1948में एक सार्वभौम घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ के जरिए की । दुनियां में मानव को व्यक्तिगत भलाई के साथ साथ सामुदायिक भलाई के लिए न केवल अधिकार मिलना चाहिए बल्कि उन अधिकारों की सुरक्षा भी होना चाहिए। एशियाई और अफ्रीकी देशों को छोड़कर शेष महाद्वीपों के महत्वाकांक्षी शासकों ने सारी दुनियां में मानव के शोषण में कोई कमी नहीं की। रंग भेद भले ही कागजों में है लेकिन अभी भी गोरे वर्ण के लोगों के द्वारा भेद तो किया जा रहा है। वर्ण…

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एक गुरु क दो चेले सचिन कहां,विनोद कहांभारतीय क्रिकेट टीम में कई खिलाड़ी ऐसे हुए जिनके प्रदर्शन को देख कर लगता था कि वे स्थाई खिलाड़ी बनेंगे लेकिन बाहरी दुनिया के प्रभाव ने उनको अंधकार की दुनियां में धकेल दिया।ऐसे ही एक खिलाड़ी रहे विनोद कांबली। पिछले दिनों एक रील वायरल हुई जिसमें विनोद कांबली और सचिन तेंडुलकर के प्रशिक्षक दिवंगत (स्वर्गीय उचित शब्द नहीं है)रमा कांत आचरेकर के सम्मान में आयोजन हुआ।इस आयोजन में दोनों शिष्य मौजूद रहे।आयोजन के आकर्षण निःसंदेह सचिन तेंडुलकर रहे वही एक कोने में विनोद कांबली दरकिनार हुए नजर आए।सचिन और विनोद चर्चा में तब…

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दुर्घटना और मौत:ऐसे तूफान न ही आएआजकल तूफानों के नाम रखने का रिवाज है।ऐसे तूफान एक समय विशेष के होते है जिसका प्रभात तात्कालिक होता है। आजकल फ़ेंगल तूफान के चलते सुबह कोहरा और दिन भर गहरे काले बादल छाएं हुए है। हल्की बरसात भी हो रही है।कुछ दिनों में इस तूफान का असर थम जाएगा।एक तूफान कल सुबह 5बजे आया और चार परिवार के संभावनाओं से भरे युवा जीवन को तबाह कर गया। अंबिकापुर बिलासपुर नेशनल मार्ग पर एक ट्रक और कार दुर्घटना में रायपुर के चार युवा जीवन का अंत हो गया।मै जिस जिम का सालाना सदस्य हूं…

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करण अर्जुन के बहानेतीस साल पहले “क”नाम से फिल्म बनाने वाले राकेश रोशन ने एक फिल्म बनाई थी – “करण अर्जुन”।पुनर्जन्म विषय पर बनी इस फिल्म का एक डायलॉग “मेरे करण अर्जुन आयेंगे” ।ये डायलॉगआज भी अविस्मरणीय डायलॉग है। करण अर्जुन फिल्म तीस साल बाद सिनेमाघरों(आज के दौर में मल्टीप्लेक्स) में फिर से लग रही है। कॉन्वेंट स्कूल से निकली नई जनरेशन इस फिल्म को देखेंगे या नहीं देखेंगे ये तो वक्त ही बताएगा। ये भी संशय है कि तीस साल पहले का दर्शक जो टेलीविज़न और नेट फिलिक्स पर घर बैठे फिल्म को अपने हिसाब से टुकड़े टुकड़े में…

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दिवाली का त्यौहार बनाम गिफ्ट पैकेट दिवाली हर साल आती है, आगे भी आएगी।खुशियों का पर्व तो है ही,इससे ज्यादा वैभव का भी पर्व है। वैभव और आत्मीयता को दिखाने के अलावा कुछ मीठा हो जाए या मुंह मीठा करने करवाने का भी पर्व दीपावली है।बदलते जमाने के साथ साथ लोग भी बदले ,दस्तूर भी बदले। पहले दिवाली मिलन एक परम्परा थी। अपने परिवार सहित स्नेहीजनों के यहां जाकर शुभ कामनाएं देने का रिवाज था।घर में बने पकवान अपनत्व का परिचायक थे,अभी भी है लेकिन सीमित होते जा रहे हैमोबाइल ने कमोबेश ये हक छीन लिया। शुभ कामनाएं तो इलेक्ट्रानिक…

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मिथुन दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित!क्या पश्चिम बंगाल की राजनीति का सरोकार मिथुन चक्रवर्ती को मिले दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से है? इससे परे अपने पहले ही फिल्म मृगया में राष्ट्रीय अभिनेता का पुरस्कार जीतने वाले मिथुन चक्रवर्ती को संतोष होगा कि वे भारत के विभिन्न भाषाओं के स्थापित फिल्म बिरादरी में जुड़ गए है। “गरीबों के अमिताभ”कहे जाने वाले मिथुन चक्रवर्ती भारतीय फिल्म उद्योग में अनोखे ही कलाकार रहे है।फिल्मों में डांस एक प्रमुख छौंक है जिसके चलते फिल्मे दौड़ती है। मिथुन चक्रवर्ती भी शम्मी कपूर ,जितेंद्र, परंपरा के नायक थे। इन्होंने देशी माइकल जैक्सन का संस्करण अपनाया…

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शहर के नायक थे सदाबहार देव आनंद हिन्दू धर्म मे मान्यता है कि एक व्यक्ति का जीवन अमूमन सौ साल का होता है। इस निर्धारित उम्र में कितनी आयु जीता है और कैसे जीता है ये बात मायने रखती है। सुख- दुख, सफलता-असफलता को जीवन मे एक सिक्के के दो पहलू माने जाते है। सुख और सफलता के समय सामंजस्य बनाये रखना साथ ही दुख – असफलता में संतुलन बनाये रखना ही मायने रखता है। देव आनंद की “गाइड” जीवन दर्शन की एक सच्ची दास्तां थी। फिल्म उद्योग में एक कलाकार ऐसा रहा जिसने इस मापदंड को जीवन भर अपनाया।…

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पहला टेस्ट और दोहरा शतकक्रिकेट में रिकार्ड का अपना अलग संसार है।इस खेल में बनने वाले रिकार्ड का लेखा जोखा इतने विस्तार से है कि लाखो लेख लिखे जा सकते है। ऐसे में एक लेख है पहले टेस्ट में दोहरा शतक। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 1877से 2024की147 साल के इतिहास में 184दोहरे शतक लगे है ।इसमें से केवल सात खिलाड़ी ऐसे है जिन्होंने अपने जीवन के पहले टेस्ट में दोहरा शतक लगाया है। इन सात खिलाड़ियों में वेस्ट इंडीज के लॉरेंस रो अकेले खिलाड़ी है जिन्होने अपने पहले टेस्ट के दोनो पारियों में दोहरा शतक और शतक लगाया है।पहले…

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राष्ट्र कवि, रामधारी सिंह दिनकर,जिन्होने नेहरू को सिर झुकाने पर मजबूर कर दिया।रामधारी सिंह दिनकर, बेलाग और बेखौफ अभिव्यक्त करने वाले कलमकार थे।उन्हे इस बात का लिहाज कभी नहीं रहा कि उन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राज्यसभा में ले जाकर उपकृत किया है। 20जून 1962का सदन में पंडित जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में रामधारी सिंह दिनकर ने कहना शुरू किया “देश में जब भी हिंदी को लेकर कोई बात कही जाती है तो देश के नेतागण ही नहीं कथित बुद्धजीवी भी हिंदी वालो को अपशब्द कहे बिना आगे नहीं बढ़ते। पता नही इस परिपाटी का आरंभ किसने किया?मेरा ख्याल है…

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ध्यानचंद का ध्यान किसे है?भारत को देश दुनियां में 1971के पहले तक किस खेल में जाना जाता था, अगर ये प्रश्न संघ लोक सेवा आयोग सहित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पूछा जाता तो एक ही उत्तर होता -हॉकी। ये प्रश्न भी पूछ लिया जाता कि दुनियां में हॉकी का जादूगर किसे कहा जाता है तो भी मेजर ध्यानचंद का नाम आसानी से ले लिया जाता।इस खिलाड़ी के बलबूते पर भारत तीन बार ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीता था।इसी खिलाड़ी के समर्पण का असर है कि भारत पिछले दो ओलंपिक खेलों में हॉकी का मेडल लेकर आया है। इस…

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