कहाँ पर थमेगी पेट्रोल की कीमत आम आदमी के जीवन में पेट्रोल अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।इसके बिना जीवन चलना लगभग असंभव हो चला है। थोड़ी सी भी दूरी हो तो इंसान दो पहिया वाहन उठाता है उद्देश्य की पूर्ति कर लेता है। एक समय था कि पेट्रोल की कीमत में साल भर में एक दो रुपए की बढ़ोतरी हो जाती थी तो विरोध बढ़ जाता था। बवाल मच जाता था।धरना प्रदर्शन का तांता लग जाता था। विपक्ष के लियें महंगाई मुद्दा बन जाया करती थी। मई के महीने में तीन बार पेट्रोल डीजल के मूल्य में वृद्धि हुई। अमेरिका इराक युद्ध के चलते पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित हुई है ये देश का पेट्रोल डीजल उपभोक्ता जान रहा है। पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव के चलते पेट्रोल डीजल के दाम नहीं बढ़ना राजनैतिक कारण थे। चुनाव परिणाम के आने के तीन सप्ताह में पेट्रोल का मूल्य लगभग साढ़े सात रुपए बढ़ गए। ये बढ़ोतरी तीन किश्तों में की गई। माना जा रहा है कि अगले एक दो महीने में लगभग बीस से पच्चीस रुपए लीटर दाम और बढ़ेंगे। ऊर्जा के क्षेत्र में हिंदुस्तान आत्म निर्भर नहीं है। खाड़ी के देशों के अलावा रूस और अमेरिका पेट्रोलियम पदार्थों के बड़े निर्यात करने वाले है। वर्तमान में लगभग एक सौ अनठावन लीटर कच्चा पेट्रोलियम तेल अठहतर डालर का पड़ रहा है। एक डालर की कीमत छियानवे रुपए है।इस हिसाब से एक सौ उनसठ लीटर कच्चा पेट्रोलियम तेल लगभग साढ़े आठ हजार रुपएमें आ रहा है। इस रिफायनरी में रिफाइन करने में बामुश्किल साठ से पचहत्तर लीटर पेट्रोल बनता है । इस प्रकार एक सौ इकतालीस रुपए लीटर पेट्रोल रिफाइन होने के बाद होता है।परिवहन कर डिपो तक पहुंचाने, और पेट्रोल पंप तक पहुंचाने के बाद टैक्स और कमीशन की राशि अलग होती है। इन सभी को जोड़ ले तो एक लीटर पेट्रोल अनुमानत: एक सौ सत्तर रुपए लीटर पड़ता है।

वर्तमान में पेट्रोलियम कंपनी को प्रतिदिन छह सौ करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। इस बात को ध्यान में रख कर सरकार एक बार में दाम बढ़ाने के बजाय किश्तों में दाम बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से महंगाई का बढ़ना स्वाभाविक है। पेट्रोल तो मुख्यत: व्यक्तिगत परिवहन के काम आता है लेकिन डीजल के जरिए यात्रियों और सामानों का परिवाहन रेल और सड़क मार्ग से होता है। डीजल के दाम बढ़ने से सभी सामानों की कीमत बढ़ना तय है। बात आती है देशवासियों पर । युद्ध के चलते और ऊर्जा क्षेत्र में पेट्रोलियम पदार्थों के लिए दूसरों पर निर्भरता को कैसे समझे। एक जमाना था कि समाचारों और सच्चाई के अभाव में नाराजगी तेजी से बढ़ती थी। वर्तमान में पेट्रोल के साढ़े सात रुपए लीटर दाम बढ़ने के बावजूद विरोध की तुलना में समझदारी दिखी है। लोगो को दाम से ज्यादा पेट्रोल डीजल मिलने की चिंता है। बीते दिनों में लोग ये भी सुनते मिले कि भले ही दाम बढ़ जाए लेकिन पेट्रोल डीजल मिलना चाहिए।सरकारी स्तर नियंत्रण की बात चल रही है। काफिलों से कारों की संख्या कम की जा रही है लेकिन बात जनता के हिस्से में भी जाती है संयम भी रखना होगा और नियंत्रण भी रखना होगा। पेट्रोल डीजल की कमी एक प्रकार से उर्जा आपदा है|
