महिला आरक्षण और संकल्प
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार ने विधान सभा का विशेष सत्र बुलाया। लोकसभा और विधान सभा में परिसीमन के बाद तैंतीस फीसदी आरक्षण के लिए शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया। पक्ष और विपक्ष के द्वारा अपने अपने तर्क रखे गए। इसके साथ ही एक दिन का विशेष सत्र खत्म हो गया।
लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के अभाव में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक गिर चुका है।संवैधानिक रूप से हासिल कुछ नहीं आना है।
भाजपा जान रही थी कि लोकसभा में खुद के दो तिहाई बहुमत न होने के बावजूद राजनीति की बिसात पर हार कर भी जीतने का सफल दांव लगा चुकी है।बारी है सदन के बाहर ये बताना कि विपक्ष की नीयत में खोट है। विपक्ष अपने तर्क दे रहा है कि नीयत ठीक है तो भाजपा कथनी के बजाय करनी दिखाए।
करनी में क्या क्या करना चाहिए? ये नसीहते विपक्ष दे रहा है। मौजूदा सीट संख्या की स्थिति में ही तैंतीस फीसदी आरक्षण महिलाओं के लिए कर दिया जाए।ये एक ऐसा सुझाव है । हर राज्य की लोक सभा और विधान सभा सीट को सामान्य, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए सुरक्षित सीट संख्या का तैंतीस फीसदी सीट लॉटरी के आधार पर निकाल दिया जाए। भाजपा की केंद्रीय सरकार देश में परिसीमन कर दो सौ तिरालीस सीट बढ़ाने की पक्षधर है।इसी प्रकार राज्यों की विधान सभा सीटों की संख्या और परिसीमन मुद्दा है।
क्या भाजपा तुरुप का पत्ता निकाल सकती है?
विपक्ष ने कुछ बाते ऐसी कही है जिसे लागू कर भाजपा अपनी करनी को दिखा सकती है।
विपक्ष का कहना है कि भाजपा को केंद्र और विधान सभा में मंत्री परिषद की संख्या का तैंतीस प्रतिशत मंत्री पद महिलाओं को देना चाहिए।

केंद्र में मंत्रियों की संख्या इक्यासी निर्धारित है। तैंतीस प्रतिशत के हिसाब से 26 मंत्रीपद महिलाओं को देकर बताया जा सकता है कि कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं है।इसी प्रकार भाजपा शासित प्रदेशो में भी मंत्रियों की निर्धारित संख्या का तैंतीस प्रतिशत महिला विधायकों को देना चाहिए
विपक्ष भाजपा से ये भी पूछ रहा है कि महिलाओं की पैरवी करने वाले केवल दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री रखे है। नियत साफ है तो जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है उनका तैतीस प्रतिशत मुख्य मंत्री याने पांच मुख्यमंत्री महिलाओं को बनाना चाहिए।
ऐसा ही पहल भाजपा को संगठन में करना चाहिए। कांग्रेस तो ये कह सकती है कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष इंदिरा गांधी रही है, सोनिया गांधी रही है।भाजपा के पास ऐसा उदाहरण नहीं है।
विपक्ष ने सवालों के घेरे में भाजपा को खड़ा किया है।अगले साल देश के पांच राज्य उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधान सभा चुनाव है।भाजपा के कथनी और करनी को एक जैसा दिखाना है तो उत्तर प्रदेश की403 सीट में से 133 सीट महिलाओं को देकर सिद्ध करना चाहिए । लोक सभा में महिला आरक्षण विधेयक गिरने के बावजूद भाजपा अपने चाल चेहरा और चरित्र को एक समान दिखाना चाहती है तो आगे बढ़े
छत्तीसगढ़ सरकार के शासकीय संकल्प में परिसीमन के बाद की बात है।विपक्ष परिसीमन के बगैर मौजूदा सीट संख्या पर भाजपा की परीक्षा लेना चाह रही है। पक्ष और विपक्ष टेनिस खेल रहे है। महिला आरक्षण की बाल सामने वाले के कोर्ट में डालकर मैच जीतने का मुद्दा भर है।होना जाना कुछ नहीं है।
