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Author: mitaanindiamedia
सुबह और शाम काम ही काम
सुबह और शाम काम ही काम इन्फोसिस कंपनी के संस्थापक कृष्णमूर्ति ने देश को विकसित बनाने के लिए युवाओं से सप्ताह में सत्तर घंटे काम का आव्हान किया। इसके बाद काम के घंटे को लेकर बहस जारी है। अदाणी के ये कहने पर कि हर दिन अवकाश को छोड़कर बारह घंटे काम करने पर बीबी छोड़ देगी।परस्पर विरोधाभास की स्थिति बनी है। काम के घंटे कितने हो और कितने है,ये बड़ी रोचक बात है। देश दुनियां में मानसिक और शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति है। मानसिक श्रम करने वालो के पास कार्य स्थल शारीरिक रूप से कार्य करने वालों की…
उज्ज्वल दीपक यंग लीडर्स अवार्ड से सम्मानित
भाजपा के युवा नेता उज्ज्वल दीपक को राजनीति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, नेतृत्व क्षमता और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों के लिए ऋषिहुड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रतिष्ठित यंग लीडर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम ऋषिहुड यूनिवर्सिटी सोनीपत द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया था। भारत सरकार के पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु और प्रसिद्ध उद्योगपति श्री अजय पीरामल जी द्वारा यह अवार्ड उज्ज्वल दीपक को प्रदान किया गया। “यंग लीडर्स अवार्ड से सम्मानित करने के लिए मैं पूरे विश्वविद्यालय परिवार का आभारी हूँ। मुझे प्रसन्नता है की मेरे द्वारा किए जा…
पितृ दिवस
आज पितृ दिवस हैअनेक पिता को अपने पिता होने पर गर्व हो सकता है कि उन्होंने अपना सारा जीवन बच्चो के जीवन बनाने में लगा दिया।आज उनके बच्चे मेट्रो में काम कर रहे है। ये भी गर्व का विषय होगा। ऐसे गर्वीले पिता को बधाई,सच ये भी है कि आज का युग संवेदना का युग नही रह गया है।व्यवहारिक समय है, अर्थ का अनुसंधान सर्वप्राथम्य है। इसके बाद युवा जीवन है,जिसकी अपनी प्राथमिकता है। एक माइक्रो परिवार है।जिसमे मैं, मेरी पत्नी और मेरा बच्चा है।यहां पर आपका पुत्र भी पिता है और उसकी भी वही बाध्यता है जो आपकी पिता…
भारतीय PRESS
हम भारतीय है, कही भी हो हम भारतीय है क्योंकि भारत हममें बसता है, हमारे दिल में धडकता है।हमारे धमनियों में बहता है। भारतीय होने का एक अहसास भी है अभिव्यक्त होने का,हममें से अधिकांश लोगो की एक कमी है और खूबी भी है कि हम केवल बोले हुए शब्दो में अभिव्यक्त होते है। अपने परिवार में, अपने संबंधियों में, अपने दोस्तो में, अपने परिचितों में बोले हुए शब्द ही कहे सुने जाते है।सदियों से बोल कर बताने समझाने का चलते रहा है। जनश्रुत से बढ़ते बढ़ते हम लिखने पढ़ने की परंपरा के सहभागी बने और कालांतर में एक साथ…