Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    रॉयल्स जीत चैलेंजर्स बेंगलुरु

    June 1, 2026

    कहाँ पर थमेगी पेट्रोल की कीमत

    May 28, 2026

    शाबाश हरमन प्रीत कौर

    May 26, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    भारतीय PRESS
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe Monday, June 1
    • होम
    • समाचार
      • आर्थिक
      • अपराध
      • राजनीतिक
      • सामाजिक
    • लेखन
      • आलेख
      • चिंतन
      • कहानी
      • कविता
      • विश्लेषण
      • व्यंग
    • इल्मी-फिल्मी
      • इतिहास
      • कला
      • पुरस्कार
      • समीक्षा
      • धार्मिक संस्कृति
    • तंदुरुस्ती
      • खेल
      • खिलाड़ी
      • योग
    • तकनीकी
    • फोटो
    • वीडियो
    • हमारे बारे में
      • विचार
      • टीम
      • संपर्क
      • कंपनी प्रोफाइल
    • English
      • Art and Culture
      • Political
      • Religion
      • Social
    भारतीय PRESS
    Home»Featured»कांटा लगा या हटा
    Featured

    कांटा लगा या हटा

    Sanjay DubeyBy Sanjay DubeyJune 17, 2024No Comments5 Mins Read25 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Copy Link Email
    Follow Us
    Google News Flipboard
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

    कांटा लगा या हटा
    अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के दमदार लोकप्रिय जन प्रतिनिधि के रूप में बृज मोहन अग्रवाल का नाम किसी के लिए नया नहीं है।बहुत पुराना है। सत्ता चाहे कांग्रेस की हो या उनके भाजपा की, बृज मोहन अग्रवाल के जीत पर पिछले आठ बार से कोई फर्क नहीं पड़ा (सिवाय 2019के विधान सभा चुनाव के जब पहली और आखरी बार उनकी कांग्रेस प्रतिद्वंदी पर बढ़त पिछले चुनाव की तुलना में कम हुआ था)। इसकी भी कसर बृज मोहन अग्रवाल ने 2023के विधान सभा चुनाव में निकाल लिया। इस बार उन्होंने प्रदेश में सर्वाधिक वोट (67हजार)से जीतने का रिकार्ड बनाया।
    इस जीत के साथ ही एक चर्चा राजनीति के गलियारे में शुरू हुई कि प्रदेश में बदलते समीकरण के चलते कद्दावर नेताओं का भविष्य क्या होगा?
    छत्तीसगढ़ में आदिवासी बहुल क्षेत्रों से भाजपा को जिस प्रकार का समर्थन मिला वह सुखद तो था ही आश्चर्य जनक भी था। सरगुजा की सभी चौदह सीटों पर भाजपा का कमल खिल गया। इसके साथ ही ये भी तय हो गया कि देश और राज्य में राजनीति का ध्रुवीकरण जातिगत ही होगा। हुआ भी विष्णु देव साय राज्य के अपेक्षित जनजाति नेतृत्व के प्रतीक बने। बृज मोहन अग्रवाल की बदकिस्मती है कि वे व्यवसायिक जाति से आते है और छत्तीसगढ़ में ये आम धारणा है कि व्यवसाय से संबंध रखने वाले लोगो ने कभी शोषण किया है(जैसे ब्राह्मणों ने कभी उपेक्षित जाति के लोगो के कान में गर्म शीशा डाला है)। इस कारण वे इस जनम में तो मुख्य मंत्री नही बन सकते थे। मंत्री बनने से उनको भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व भी नहीं रोक सकता था लेकिन कद छोटा करने का वजूद केंद्रीय नेतृत्व रखता है और इसका इस्तमाल भी हुआ।


    आप अंदाजा लगा सकते है कि केंद्र में स्पष्ट बहुमत272 से 32सीट दूर240सीट में अटकने और सहयोगी दलों के बैसाखी के सहारे के बावजूद प्रथम पांच मंत्री यथावत रहे। इसके पलट छत्तीसगढ़ में पहली दूसरी बार जीते विधायक महत्वपूर्ण विभाग में आसीन हो गए ।ये एक तरह से जनमत की उपेक्षा थी।वरिष्ठता की अवहेलना थी।
    छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव के निर्णय आने के साथ साथ लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई तो ये आसार भी नजर आने लगे थे कि भाजपा के प्रयोगशाला में नए रासायनिक लोचा होगा। हुआ भी। कयास के तौर पर बृज मोहन अग्रवाल का नाम उछला या उछाला गया ये राजनैतिक पंडित बहुत अच्छे से समझते है। ये भी कहा जाता है कि केंद्र के एक मंत्री छत्तीसगढ़ में अपने मोहरो को स्थापित करने के चाल में सफल होने केलिए विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सार्वजनिक रूप से जनता को आशान्वित भी किया था। यदि भाजपा, सामान्य क्षेत्र से बहुमत पाती तो शायद आश्वाशन फलीभूत भी होता लेकिन सारे समीकरण बदल गए।
    नया समीकरण क्या बना?
    नए समीकरण में बृज मोहन अग्रवाल का कद छोटा किया गया। आठ बार की विजयी विधायक को स्कूल शिक्षा मंत्री बनाया जाना उनकी वरिष्ठता को न केवल अनदेखा करना था बल्कि नौसिखियो के सामने उपेक्षा भी था।शायद लोग भूल जाते है कि योग्यता होने पर पांडवो ने खांडवप्रस्थ को इंद्रप्रस्थ में बदल दिया था। बृज मोहन अग्रवाल ऐसा व्यक्तित्व है जिससे विभाग महत्वपूर्ण हो जाते है भले ही विभाग कितना भी साधारण हो।
    मुझे लगता है कि बृजमोहन अग्रवाल के भीतर पांडव जैसे पांच गांव लेने के बाद उसे साम्राज्य में बदलने की क्षमता को दुर्योधन और शकुनि जानते थे वैसा ही कुछ केंद्रीय नेतृत्व में पका। बृज मोहन अग्रवाल को रायपुर संसदीय क्षेत्र से टिकट देकर, राज्य से टिकट काटने का काम हो गया। जीतना उनका स्वभाव है सो रायपुर की जनता ने उन्हे रिकार्ड 5.75लाख वोट से जीता कर दिखा दिया कि वे रायपुर दक्षिण ही नहीं रायपुर लोकसभा अंतर्गत आने वाले नौ विधानसभा क्षेत्र के भी मोहन भईया है।


    केंद्र में 400पार के नारे के साथ उतरी भाजपा को आशातीत सफलता नहीं मिली। बहुमत से 32सीट दूर खड़े होने पर बहुत सारे समीकरण बदल रहे है। बहुमत आने पर मनमाने निर्णय लेने की जगह भईया दादा के दिन आ गए है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपने को बनाए रखने के लिए उन राज्यों में संतुलन बनाने की झखमारी है जहा के वोटर्स ने सरकार बनाने में या कहे भाजपा को 240तक पहुंचाने में मदद की है। छत्तीसगढ़ ने ग्यारह में से दस सांसद दिए है। जो समीकरण संख्यात्मक रूप से मंत्री बनाने के लिए दिखती है याने चार पीछे एक मंत्री, इस हिसाब से छत्तीसगढ़ को कम से कम दो मंत्री मिलने चाहिए थे। अगर वरिष्ठता का भी आंकलन होता तो दुर्ग के सांसद विजय बघेल को पद मिलना था। भाजपा के प्रति समर्पण और वरिष्ठता को ध्यान में रखा जाता तो बृज मोहन अग्रवाल सब पर भारी थे। केंद्रीय नेतृत्व ने बिलासपुर के सांसद तोखन साहू को अवसर दिया है। ऐसा क्यों हुआ, ऐसा क्यों किया गया, ये राजनीति के पंडितो के लिए ग्रह नक्षत्र के चाल का विषय है।
    बृज मोहन अग्रवाल को तीन करोड़ लोगो की जगह एक सौ बयालीस करोड़ जनता की सेवा करने का अवसर मिला है। मंत्री पद मिल जाने से कभी पद महत्वपूर्ण हो जाता है और कभी व्यक्ति।इनसे परे बृज मोहन अग्रवाल है जो बिना विभाग के भी उतने ही महत्वपूर्ण है, जितने विभाग में रहते तो होते।

    Follow on Google News Follow on Flipboard
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Email Copy Link
    Sanjay Dubey
    • Website

    Related Posts

    रॉयल्स जीत चैलेंजर्स बेंगलुरु

    June 1, 2026

    कहाँ पर थमेगी पेट्रोल की कीमत

    May 28, 2026

    शाबाश हरमन प्रीत कौर

    May 26, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    भारतीय पत्रकारिता महोत्सव

    June 24, 2024266 Views

    Power struggle or policy stagnation?

    August 14, 2024133 Views

    भारतीय PRESS

    June 1, 2024128 Views

    Dushasan

    June 16, 2024111 Views
    Don't Miss

    रॉयल्स जीत चैलेंजर्स बेंगलुरु

    June 1, 20262 Mins Read1 Views

    रॉयल्स जीत चैलेंजर्स बेंगलुरु एक टीम जिसमें क्रिस गैल, डिविलियर्स और विराट कोहली जैसे बल्लेबाज…

    कहाँ पर थमेगी पेट्रोल की कीमत

    May 28, 2026

    शाबाश हरमन प्रीत कौर

    May 26, 2026

    आईपीएल:दोबारा ट्रॉफी जीतने पहुंची चार टीम

    May 26, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us

    भारतीय प्रेस – विचारो की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसा प्लेटफार्म है जो देश विदेश में रहने वालो के विचार लेखन के लिए अपनी जगह है। यहां न उम्र की सीमा है न जाति का बंधन है न ही लिंग भेद है, न धर्म का रोड़ा है।सबके हाथ में अगर कलम है तो उन्हें अभिव्यक्त होने का भी अधिकार है।

    Email Us: bharatiyapress@gmail.com
    Contact: +91 9109031157

    Facebook Instagram WhatsApp
    Our Picks

    रॉयल्स जीत चैलेंजर्स बेंगलुरु

    June 1, 2026

    कहाँ पर थमेगी पेट्रोल की कीमत

    May 28, 2026

    शाबाश हरमन प्रीत कौर

    May 26, 2026
    Most Popular

    सोरेन का अनर्गल प्रलाप निंदनीय है

    June 30, 20240 Views

    पिता की अहमियत

    July 25, 20240 Views

    स्वच्छ्ता की अलख – पीएसआई-इंडिया सम्मानित

    August 28, 20240 Views
    • होम
    • समाचार
    • लेखन
    • इल्मी-फिल्मी
    • तंदुरुस्ती
    • तकनीकी
    • हमारे बारे में
    © 2026 Mitaan India Media Pvt. Ltd. | All Rights Reserved.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.