क्या 543 सीट पर महिला आरक्षण ही सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था है? लोकसभा में दो तिहाई बहुमत न मिलने के प्रत्याशा के बावजूद मोदी सरकार द्वारा महिला वंदन बिल लोकसभा में पेश किया गया। होना वही था जो हुआ, विपक्ष के किसी भी सदस्य ने अंतरात्मा की आवाज नहीं सुनी, जैसे उम्मीद की गई थी। जाहिर है विधेयक के धराशाई होने बाद सड़क की राजनीति होना है।भाजपा ने अपनी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री के माध्यम से विपक्ष के नाम संदेश जारी कर दिया। इसे राष्ट्र के नाम संदेश कह कर संबोधित किया गया है। भाजपा देश भर में ये बताने सड़क पर उतर गई है कि देश की विपक्षी पार्टी कांग्रेस, तृण मूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कगझम ने देश की महिलाओं के साथ गद्दारी की है।दूसरी और विपक्ष खासकर तृण मूल कांग्रेस और आल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कग़झम जिनके राज्य में चुनाव होने वाला है उनको ये रणनीति बनानी पड़ रही है कि वे महिला आरक्षण के नहीं बल्कि परिसीमन के विरोधी है। देश के 96.88करोड़ मतदाताओं में 46.46 करोड़ महिला मतदाता है। लोकसभा और विधान सभा में इन्हें 33 फीसदी सहभागिता देने के लिए देश की जनसंख्या के हिसाब से दस लाख मतदाताओं के बीच एक सीट के फार्मूले को पंद्रह लाख की जनसंख्या में एक सांसद के फॉर्मूले के आधार पर वर्तमान लोकसभा सीट संख्या 543 बढ़ाकर हो रही थी।इसके लिए परिसीमन हुए बगैर निराकरण नहीं हो सकता था। परिसीमन का विरोध अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं के निर्वाचन में आरक्षण का विरोध भाजपा मानकर मुखर हो चली है।ये भी तय हो गया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में 543 सीट पर ही चुनाव होगा। विपक्ष की मांग है कि बिना परिसीमन के 2029 का लोकसभा चुनाव हो और इसी सीट संख्या में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीट सुरक्षित कर दिया जाए। ऐसा कह कर विपक्ष ने गेंद भाजपा के पाले में डाल दिया है। भाजपा संचालित सरकार के पास फिलहाल दो साल का समय है जिसमें ये मंथन कर सकती है कि मौजूदा परिस्थिति में 543 सीट में ही आरक्षण का दांव खेलकर विपक्ष को विपक्ष के जाल में फंसा दिया जाये?वर्तमान में जो विधेयक लोकसभा में लाया गया था उसमें देश की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन कर वर्तमान लोकसभा सीट संख्या बढ़ाना था। देश पहले जाति फिर धर्म और अब लिंग के आधार पर सरकार बनाने के दौर में पहुंच चुका है।हर पार्टियां महिलाओं को अपने पक्ष में लाने के लिए आर्थिक प्रलोभन परोस रहे है। महिला सशक्तिकरण के नाम पर हर पार्टी के पास योजना है, सरकार बनने पर बांटने वाली राशि का खुलासा है।

पिछले दस सालों में केंद्र और राज्य की हर पार्टियों की सरकार ने नगद राशि का महिलाओं के खाते में ट्रांसफर करने की योजना परोसी है और जीतने पर ईमानदारी से दिया भी है। विपक्ष द्वारा लोकसभा में गिरा विधेयक महिलाओं को केंद्र और राज्य की विधान सभा सीटों में आरक्षण देने का जीता हुआ दांव न देने की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा, इसे अपने तरीके से देख रही है। ये भी माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के लिए महिला आरक्षण को एन मौके पर परोसना”करो या मरो” की नीति थी। तमिलनाडु में सत्ता का संघर्ष क्षेत्रीय पार्टी अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कग़झम और द्रविड़ मुनेत्र कग़झम के बीच है, इस कारण लोकसभा में गिरा विधेयक मायने नहीं रखेगा।केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के पास अब पाक साफ नीयत दिखाने के लिए 543 सीट में ही 33 फीसदी महिला प्रत्याशियों के आरक्षण का विकल्प शेष बचता है।इस विकल्प में 543 सीट में से देश की 135 सामान्य, 25 अनुसूचित जाति और 14 अनुसूचित जनजाति की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। सामान्य सीट वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश की 26, महाराष्ट्र की 16, बंगाल,बिहार तमिलनाडु से 12-12 लोकसभा की सामान्य सीट मुख्यत: महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी।मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, और केरल से 9-9 सीट महिलाओं के हिस्से में चली जाएगी। उड़ीसा से 7 सामान्य सीट महिलाओं को मिलेगी। आसाम छत्तीसगढ़, पंजाब झारखंड से 3-3 सीट महिलाओं के खाते में जाएंगी। अनुसूचित जाति के लिए उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्य में महिलाओं को ज्यादा फायदा मिलेगा। अकेले उत्तर प्रदेश में 7 अनुसूचित जाति सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी। अनुसूचित जनजाति के लिए उत्तराखंड,उड़ीसा, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में 2-2 सीट मोटामोटी आरक्षित हो जाएगी। ये फार्मूला फायदे की योजना साबित होगी या घाटे की ये बात तब सामने आएगी जब लाटरी सिस्टम से मौजूदा 543 लोकसभा सीट का आरक्षण महिलाओं के सुरक्षित कर दी जाएगी। पुरुष सत्तात्मक समाज में महिलाओं को प्रमुखता देने पर लिंग के आधार पर अनेक जमे जमाए लोकसभा के सदस्यों का पत्ता कट जाएगा। इसके अलावा संगठन के संभावित प्रत्याशियों के लिए नये क्षेत्र का विकल्प पार्टी के लिए सिरदर्द ही साबित होगा।सारा समीकरण 4 मई के चुनावी नतीजे पर निर्भर करता है। यदि भाजपा बंगाल फतह कर लेती है तो 2029 में मौजूदा 543 सीट पर दांव लगा सकती है अन्यथा राजनीति में दो और दो चार ही नहीं तीन और पांच होता ही है।
प्रकार | राज्य / केन्द्र-शासित प्रदेश | लोकसभा सीटें | सामान्य वर्ग | अनुसूचित जाति | अनुसूचित जनजातिराज्य | उत्तर प्रदेश | 80 | 63 | 17 | राज्य | महाराष्ट्र | 48 | 39 | 5 | 4
राज्य | पश्चिम बंगाल | 42 | 30 | 10 | 2राज्य | बिहार | 40 | 34 | 6 | 0राज्य | तमिल नाडु | 39 | 32 | 7 | 0राज्य | मध्य प्रदेश | 29 | 19 | 4 | 6राज्य | कर्नाटक | 28 | 21 | 5 | 2राज्य | गुजरात | 26 | 20 | 2 | 4राज्य | आन्ध्र प्रदेश | 25 | 20 | 4 | 1राज्य | राजस्थान | 25 | 18 | 4 | 3राज्य | ओडिशा | 21 | 13 | 3 | 5राज्य | केरल | 20 | 18 | 2 | 0राज्य | तेलंगाना | 17 | 12 | 3 | 2राज्य | असम | 14 | 11 | 1 | 2राज्य | झारखण्ड | 14 | 8 | 1 | 5राज्य | पंजाब | 13 | 9 | 4 | 0राज्य | छत्तीसगढ़ | 11 | 6 | 1 | 4राज्य | हरियाणा | 10 | 8 | 2 | 0केन्द्र-शासित प्रदेश | दिल्ली | 7 | 6 | 1 | 0राज्य | उत्तराखण्ड | 5 | 4 | 1 | 0केन्द्र-शासित प्रदेश | जम्मू और कश्मीर | 5 | 5 | 0 | 0राज्य | हिमाचल प्रदेश | 4 | 3 | 1 | 0राज्य | अरुणाचल प्रदेश | 2 | 2 | 0 | 0राज्य | गोवा | 2 | 2 | 0 | 0राज्य | त्रिपुरा | 2 | 1 | 0 | 1केन्द्र-शासित प्रदेश | दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव | 2 | 1 | 0 | 1राज्य | मणिपुर | 2 | 1 | 0 | 1राज्य | मेघालय | 2 | 0 | 0 | 2केन्द्र-शासित प्रदेश | अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह | 1 | 1 | 0 | 0केन्द्र-शासित प्रदेश | चण्डीगढ़ | 1 | 1 | 0 | 0राज्य | नागालैण्ड | 1 | 1 | 0 | 0केन्द्र-शासित प्रदेश | पुदुचेरी | 1 | 1 | 0 | 0राज्य | मिज़ोरम | 1 | 0 | 0 | 1केन्द्र-शासित प्रदेश | लक्षद्वीप | 1 | 0 | 0 | 1केन्द्र-शासित प्रदेश | लद्दाख | 1 | 1 | 0 | 0राज्य | सिक्किम | 1 | 1 | 0 | 0कुल | भारत | 543 | 412 | 84 | 47
