बाएं हाथ का खेल इस दुनियां की आबादी छ सौ तीस करोड़ है।
इस आबादी के नब्बे फीसदी इंसान अपने रोजमर्रा के काम दाये हाथ से करते है मोटा मोटी साढ़े पांच सौ करोड़ व्यक्ति राइट हैंडर्स है, बहुमत है उनका। दुनियां की कुल आबादी में दस फीसदी लोग याने अस्सी करोड़ लोग ऐसे है जो अपने रोजमर्रा का काम दाये हाथ से नहीं बल्कि बाएं हाथ से करते है। चलताऊ भाषा में कह सकते है सीधे हाथ और उल्टे हाथ से काम करने वाले लोग है। शरीर विज्ञान मानता है कि हाथ से काम करने का नाता सीधे सीधे मस्तिष्क से है। दस फीसदी लोगों को उनका मस्तिष्क बाएं हाथ से काम करने के लिए आदेशित करता है।आज का दिन विशेष ऐसे ही बाएं हाथ से काम करने वालो का है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनियां में नब्बे फीसदी लोग जो लोग दाएं हाथ का उपयोग करते है उनका कोई अंतर्राष्ट्रीय दिवस नहीं है। 1976 के पहले तक बाएं हाथ से काम करने वाले लोगों का कोई दिन विशेष नहीं था लेकिन अमेरिकी सेना के डीन आर केम्बल ने दाए हाथ से काम करने वालो की दुनियां में बाएं हाथ से काम करने वालो को स्वीकृति देने का बीड़ा उठाया। इसका कारण भी था कि बाएं हाथ से काम करने वाले व्यक्तियों को अनेक प्रकार की चुनौती का सामना करना पड़ता रहा है।दाएं हाथ की दुनियां में उनके अनुभव खट्टे ज्यादा मीठे कम रहे है। जब से दुनियां बनी है लोगो का मानना है कि बहुत से कठिन काम को कोई दाएं हाथ का व्यक्ति सहजता से कर देता है तो ऐसा काम उनके बाएं हाथ का खेल मान लिया जाता है।इसके विपरीत बाएं हाथ से काम करने वाला कठिन काम सहजता से कर दे उसके दाएं हाथ का खेल कोई नहीं मानता है। इतिहास में जाकर देखे तो मिस्र के इतिहास में बाएं हाथ के सैनिकों को दाएं हाथ के टुकड़ी में नहीं रखा जाता था। उनको अलग से युद्ध संचालन में योजना बिगाड़ने के लिए रखा जाता था। जैसे जैसे समय बीतते गया धार्मिक आधार पर बाएं हाथ का प्रयोग वर्जित होते गया।बाएं हाथ से काम न करने के धार्मिक, ज्योतिषीय और व्यावहारिक कारणों ने इतना भय बना दिया कि प्राकृतिक रूप से बाएं हाथ से काम करने वाले बच्चों को ठोक पीट कर दाएं हाथ से काम करने पर मजबूर आज भी किया जाता है सनातन धर्म और हिंदू रीति-रिवाजों में बाएं हाथ को धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ या दान-पुण्य के लिए अशुभ माना जाता है।कर्म की शुद्धता: दाएं हाथ को ‘सकारात्मक ऊर्जा’ और ‘सक्रिय कर्म’ का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय संकल्प लेते समय या पवित्र धागा धारण करते समय पुरुषों के दाएं हाथ का ही उपयोग अनिवार्य है। महिलाएं बाएं हाथ में धागा बंधवाती है। लेकिन इसके पीछे भी महिलाओं को पुरुषों का वाम माना जाना है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारा दायां हाथ ऊर्जा देने वाला और बायां हाथ ऊर्जा लेने वाला होता है। इन अंतर्विरोध के बावजूद बाएं हाथ से काम करने वालो की संख्या पिछले पचास सालों में सात फीसदी से बढ़कर दस फीसदी हो गई है। उनके प्रति दाएं हाथ से काम करने वालो में स्वीकृति भी बढ़ी है। बताते चले कि दुनियां का सबसे प्रतिभाशाली व्यक्ति लियिर्डा विंची बाएं हाथ से काम करने वाले थे। आज हर क्षेत्र में आपको बाएं हाथ से काम करने वाले आसानी से दिख सकते है। ऐसा माना जाता है कि रचनाधर्मिता बाएं हाथ से काम करने वालो में ज्यादा होती है।इसका उदाहरण खुद लेखक है जो बाएं हाथ से सारे काम करता है|
