काकरोच जनता पार्टी सिर्फ प्रेसर ग्रुप तक ही क्यों सीमित है?
हिंदुस्तान में आजादी के बाद गिने चुने बड़े आंदोलन हुए है।इन आंदोलनों की सफलता का परिणाम ये रहा है कि राजनीति में नये दलों का उदय हुआ।
आजादी के बाद देश में कांग्रेस का एकछत्र शासन रहा।1952 से लेकर 1977 याने 25 साल तक कोई भी बड़ा विरोधी दल देश में नहीं था। इस अवधि में कोई बड़ा आंदोलन भी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं हुआ था।
5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में जय प्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति आंदोलन की शुरुआत प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के सरकार के खिलाफ शुरू किया। ये आंदोलन छात्रों से शुरू होकर राजनैतिक दलों, श्रमिक संगठन तक विस्तारित हुआ। देश में इमरजेंसी लगी ।1977 में जनता दल अस्तित्व में आया। ये देश के अनेक विपक्षी दलों का गठबंधन था। कांग्रेस को सत्ता से बाहर होना पड़ा। संपूर्ण क्रांति आंदोलन का दूरगामी परिणाम ये रहा कि भविष्य में राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकारों का जन्म होने लगा। उड़ीसा, बिहार, उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश से कांग्रेस पार्टी का अस्तित्व खतरे पड़ गया।
1990 में मंडल कमीशन लागू होने से देश में छात्र आंदोलन हुआ जिसके चलते विश्वनाथ प्रताप सिंह की जनमोर्चा सरकार गिर गई। बिहार उत्तर एप्रदेश, उड़ीसा,महाराष्ट्र में गैर कांग्रेसी दलों का उदय हुआ। कल्याण सिंह, मुलायम सिंह यादव, मायावती, लालू प्रसाद यादव नए मुख्य मंत्री के रूप में स्थापित हुए।
2011 में लोकपाल कानून लागू करने का दबाव बनाने के लिए अन्ना हजारे ने आंदोलन किया भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए आंदोलन का प्रभाव ये पड़ा कि 2014 में मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार की बिदाई हो गई। इस आंदोलन के परिणिती के रूप में आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ और प्रदेश की राजधानी नई दिल्ली में एक दशक तक आम आदमी पार्टी राज करते रही।
आंदोलनों का प्रभाव देखे तो 1977,1990 और 2014 में केंद्र में चल रही सरकार की बिदाई हुई। वही 1990 के बाद देश के राज्यों में गैर कांग्रेसी सरकार का दायरा बढ़ते गया।
हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के द्वारा युवाओं को काकरोच कहे जाने पर अभिजीत दीपके ने सोशल प्लेटफॉर्म पर काकरोच जनता पार्टी फोरम का निर्माण कर लिया।उनके फोरम को युवाओं ने पसंद किया। नीट परीक्षा में पेपर लीक मामले को लेकर काकरोच जनता पार्टी ने सोनम वांगचुक के नेतृत्व में आंदोलन किया। जिस मांग को लेकर काकरोच जनता पार्टी आंदोलनरत थी, उस मुद्दे से सोनम वांगचुक अलग हुए और उनके बिना ही काकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को संसद मार्च का निर्णय लेकर मोदी सरकार पर इतना दबाव बना ही लिया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ गया।
जेन जी के इस सफल आंदोलन के बाद राजनैतिक गलियारों में ये चर्चा होने लगी कि काकरोच जनता पार्टी का जन्म भी कमोबेश आम आदमी पार्टी के समान ही है। समानता भी है। लोकपाल बिल लाने के नाम से अन्ना हजारे आगे आए, इस बार सोनम वांगचुक आगे आए। अन्ना आंदोलन के नेतृत्व के चलते अरविंद केजरीवाल सामने आए, इस बार अभिजीत दीपके आए।अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया को सामने किया ,अभिजीत दीपके ने सौरव दास को। सामने किया।अरविंद केजरीवाल ने अपने साथी कुमार विश्वास को दरकिनार किया तो अभिजीत दीपके ने विजेता दहिया को दर किनार किया। जिस प्रकार आप पार्टी को शांति भूषण ने एक करोड़ रुपए की सहयोग राशि दी थी ,काकरोच जनता पार्टी को कपिल सिब्बल ने एक करोड़ रुपए दिया है
फर्क इतना है कि अरविंद केजरीवाल ने राजनैतिक दल बना लिया अभिजीत दीपके ने दबाव समूह ( pressure group) बनाया है। हिंदुस्तान में गैर सरकारी संगठन, संघ, समितियों के पंजीयन का शासकीय प्रावधान है। इनमें पदाधिकारी, वित्तीय जानकारी सरकार को देना होता है। आय व्यय का आडिट होता है। इसका मतलब ये है कि सरकार का नियंत्रण होता है। अभिजीत दीपके इस , झंझट में शुरुवाती दौर में फँसना नहीं चाहते।
उन पर सरकार नजर तो रखेगी क्योंकि किसी भी आंदोलन में बिना पैसे के कुछ भी नहीं हो सकता है। यद्यपि कपिल सिब्बल ने एक करोड़ रु देने की घोषणा कर चुके है, इसे किस खाते में रखा जाएगा ये फिलहाल अस्पष्ट है।
अभिजीत दीपके , 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया ग्रुप के सदस्य रहे है। इस कारण अरविंद केजरीवाल से राजनीति का कखग समझे हुए है।फिलहाल शिक्षा को क्षेत्र बनाकर दिल्ली फिर रांची में उनका कार्य क्षेत्र बना हुआ है।
अपने प्रेशर ग्रुप के पदाधिकारी घोषित करने के बाद आम आदमी की समस्या का संकलन पहला उद्देश्य है।ऐसे ही उद्देश्य को लेकर एक h
जमाने में सुनील दत्त ,चंद्रशेखर,दिग्विजय सिंह,राहुल गांधी और प्रशांत किशोर सड़के नाप चुके है।इन सभी का उद्देश्य राजनैतिक स्वार्थ का नगदीकरण था।मूल उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो पाई।
देश में बेरोजगारी एक बहुत बड़ी मुद्दा है। रोजगार का संकुचित अर्थ लेकर केवल शासकीय सेवा तक ही सीमित किया गया है। इस क्षेत्र में आरक्षण का भी ज्वलंत समस्या है। अभिजीत दीपके जब छात्रों या जेन जी की समस्याओं को लेकर सामने आयेंगे तो इस प्रतिरोध का सामना करना ही पड़ेगा। व्यवसाय को रोजगार न मानना इस देश के सभी दलों, व्यक्तियों की संकुचित धारणा है। इस कारण कोई भी दल, संगठन या प्रेशर ग्रुप व्यवसाय को प्रोत्साहित करना नहीं चाहता है।ये बात अलग है कि सत्ता में आते ही स्व रोजगार को बढ़ावा देने की सरकारी बाते होती रहती है।
क्या काकरोच जनता पार्टी, भविष्य में राजनैतिक दल के रूप में स्थापित होगी?
इस देश में लोकतंत्र है, केंद्र और राज्यों में कानून बनाने के लिए निर्वाचन पद्धति से ही आगे आना होगा। प्रेशर ग्रुप को हर राज्य की सरकार की अव्यवस्था से दो चार होना पड़ेगा। अलग अलग राज्यों में अलग अलग पार्टियों की सरकार है।सबसे पंगा लिया नहीं जा सकता है क्योंकि राजनैतिक दलों की कूटनीति, राजनीति से बहुत अधिक खतरनाक होती है।काकरोच, भी जनता पार्टी बन कर अपने भविष्य को खोजेगी तो।
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