रॉयल्स जीत चैलेंजर्स बेंगलुरु
एक टीम जिसमें क्रिस गैल, डिविलियर्स और विराट कोहली जैसे बल्लेबाज हो वह टीम सोलह साल तक विजेता न बन पाए, यकीन नहीं होता। आईपीएल में 175 रन की इकलौती पारी , छक्को के सरताज गैल सर्वाधिक रन बनाने वाले विराट कोहली और मैच पलटाने वाले डी विलियर्स के सामूहिक योगदान ने भी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को फाइनल में जीत दिलाने में सफल नहीं रही।गैल और डिविलियर्स तो थक कर संन्यास ले लिए। कोहली ने कप्तानी छोड़ दी। इतना त्याग करने से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु 2009,2011 और 2016 में फाइनल पहुंचने के बावजूद उप विजेता बन कर रह गई थी। जैसे विश्व क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका को पनौती माना गया है वैसे ही आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को पनौती मान लिया गया था।विराट कोहली के पास विश्व विजेता होने का गौरव था लेकिन बेंगलुरु के कप्तान रहते वे विजेता कप्तान नहीं बन पाये।रजत पाटीदार का कप्तान बनना रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए सौभाग्य कारक रहा।उनके नेतृत्व में उनकी टीम एक बार नहीं बल्कि दो बार लगातार विजेता बनी।

आईपीएल में दो बार ट्रॉफी जीतने वाले एक ही टीम के दो ही कप्तान है एम एस धोनी और रोहित शर्मा। रजत पाटीदार के लिए अच्छी बात ये रही कि उनको संतुलित टीम मिली और जरूरत के हिसाब से पूरी टीम ने मौके का फायदा उठाते हुए ट्रॉफी भी उठा ली ।रजत पाटीदार को विराट कोहली का साथ बढ़िया मिला। पहले बल्लेबाजी हो या विपक्षी टीम के द्वारा दिया गया लक्ष्य का पीछा करना हो, विराट , विराट ही साबित होते गए।फाइनल में भी एक तरफा विकेट सम्हाले रहे और जीत के आखिरी रन को छक्का लगाकर जश्न के रूप में दर्शकों को सेलिब्रेट करवाया। विराट कोहली शायद इकलौते खिलाड़ी है जो 2008 से एक ही फ्रेंचाइजी के लिए खेल रहे है। उनके साथ धोनी और रोहित शर्मा भी है लेकिन ये लोग दो फ्रेंचाइजी से खेले है। 9221 रन का सर्वाधिक योगदान विराट कोहली ने अपनी टीम को दिया है, ये अनोखा रिकॉर्ड है। जीत का जश्न रजत पाटीदार के लिए है तो पीछे मेहनत विराट कोहली की है।मैदान में कप्तान रजत पाटीदार होते है लेकिन एटिट्यूड विराट कोहली का रहता है।
