पेट्रोल किल्लत और आश्वासन पिछले तीन दिनों से छत्तीसगढ़ के दो चार पहिया वाहनचालक परेशान है।कारण है पेट्रोल पंप में पेट्रोल का न होना या कम होना। आम लोगों का मानना है कि अमेरिका ईरान के लफड़े में देर सबेर पेट्रोल मिलने में परेशानी होगी।ये सच भी है। इसके अलावा दूसरा बड़ा कारण है पेट्रोल डीजल के दाम में बढ़ोतरी।फिलहाल तीन रुपए लीटर दाम बढ़े है । भविष्य में और भी बढ़ेगा ये भी तय है। कितना बढ़ेगा,इस बारे में अफवाहों का बाजार गर्म है।प्रधानमंत्री के संयमित रूप से पेट्रोल डीजल गैस के उपयोग की नसीहत के बाद आम आदमी अपने आपको संयमित कम असुरक्षित मान रहा है। इसके अलावा अभाव के संसार में अतिरिक्त सुरक्षा व्यक्ति को पैनिक बना देती है। पिछले तीन दिन से सरकारी लफ्फाजी कह ले कि पेट्रोल डीजल का अभाव नहीं है,लोग विश्वास नहीं कर रहे है। अगर अभाव नहीं है तो डीजल पेट्रोल पंप में सूखा क्यों है इसका कोई जवाब सरकार के नुमाइंदों के पास नहीं है।

आश्वासनों की भरमार है लेकिन पेट्रोल पंप पर लगी कतार बता रही है कि सब कुछ ठीक नहीं है। बचाव में सबसे अच्छी बात कही जा रही है वह यह है कि पैनिक सोसायटी के नखरों के चलते स्थिति बिगड़ रही है।सच जो भी हो लेकिन भविष्य के खतरे को देखते हुए आम आदमी” टंकी फूल” करवाने में लगा है।केंद्र सरकार का कहना है कि पेट्रोल डीजल आवश्यक वस्तु है लेकिन सरकारी नियंत्रण सेपेट्रोल डीजल बाहर होचुका है। कितना पेट्रोल डीजल आया, बिका, इसका हिसाब किताब रखने पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं है।जिले के कलेक्टर फूड वालों को कह रहे है कि देख लो लेकिन जब अधिकारी , अधिकारविहीन हो वैसे ही जैसे जहरीले सांप के दांत न हो तो कौन डरेगा? आगे आगे देखिए, उम्मीद ये किया जाना चाहिए कि आम आदमी को भी नेताओं के समान अकल आएगी। पैदल चलेंगे, साइकल चलाएंगे, ऑटो में बैठेंगे, पूल कार में चलेंगे, लेकिन सिर्फ एक दो दिन। कार के काफिले छोटे होंगे लेकिन कब तक, देखते रहिए मितान, मितान एक्सप्रेस
