हम आपके है कौन?
राजनैतिक दलों में आम आदमी पार्टी सबसे नई पार्टी के रूप में चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी है। एक समय राजधानी दिल्ली राज्य में राजकाज संभालने वाली पार्टी थी।दिल्ली के बाद पंजाब में जीत ने इस पार्टी का कद राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा भी था। वर्तमान घटनाक्रम को देखे तो इस पार्टी में आंतरिक मतभेद दिन ब दिन बढ़ते जा रहा है। राज्यसभा के सात सदस्यों का पार्टी छोड़ना और भाजपा में जाना ये संदेश दे रहा है कि फिलहाल इस पार्टी में और भी टूटन होना शेष है।सांसदों के बाद विधायक भी बगावत कर सकते है। ये संकेत आप से भाजपा में गए राज्य सभा के सांसदों ने दिया भी है।
राजनैतिक विश्लेषण के आधार पर देखे तो अरविंद केजरीवाल की कथनी और करनी में अंतर के चलते पार्टी की एकजुटता बिखर रही है।
राजनीति में शुद्धता का आवरण ओढ कर अरविंद केजरीवाल ने देश के स्थापित राजनैतिक दलो को चुनौती दी थी। जिस प्रकार महात्मा गांधी ने आजादी प्राप्त होने के बाद कांग्रेस को खत्म करने की सलाह दी थी उसी प्रकार अन्ना हजारे ने लोकपाल आंदोलन मंच को राजनीति से दूर रखने की बात कही थी। अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की ही तरह बात नहीं मानी और आम आदमी पार्टी के रूप में झाड़ू थाम लिया।

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बेहतर काम करने का रिवाज अपने पहले कार्यकाल में डाला जिससे जन मानस प्रभावित हुआ। पूर्ण बहुमत भी दिया।पूर्ण बहुमत के बाद अरविंद केजरीवाल जिन सिद्धांतों को लेकर जनता के बीच में गए थे उनमें विरोधाभास दिखने लगा। कार बंगला को लेकर उनकी कथनी और करनी में फर्क दिखने लगा।
आम आदमी पार्टी के भीतर ध्रुवीकरण बढ़ने लगा जिसके चलते इस पार्टी से वे लोग पहले रुखसत हुए जो पार्टी के पिलर हुआ करते थे। उन पर अरविंद केजरीवाल ने राजनैतिक महत्वाकांक्षा का आरोप लगाया। प्रशांत भूषण, आशुतोष, योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, शाजिया इल्मी, गोपीनाथ,अलका लांबा, पहले ही पार्टी छोड़ चुके है।इस बार जो भूचाल आया उसकी स्टोरी स्वाति मालीवाल के विद्रोह के चलते शुरू हुई है।इसके बाद राघव चड्ढा को लेकर विवाद सामने आया। आश्चर्य को बात तो ये है कि राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाकर जिस व्यक्ति अशोक कुमार मित्तल पर भरोसा जताते हुए उपनेता नियुक्त किया गया था वे भी विद्रोही निकले।

दिल्ली और पंजाब में विधायकों की बड़ी संख्या के चलते राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के दस सदस्य मनोनीत हुए थे। पंजाब से सात और दिल्ली से तीन सदस्य राज्यसभा में गए थे। आम आदमी पार्टी ने पंजाब चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वालों को पारिश्रमिक दिया था लेकिन अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के दिल्ली विधान सभा चुनाव में पराजय के बाद राख के भीतर विद्रोह की आग सुलग रही थी। सबसे पहले बगावत स्वाति मालीवाल ने किया और अब छः ने आप से नाता तोड़ भाजपा में शामिल हो गए।
प्रश्न ये भी उठता है कि भाजपा ही क्यों? कांग्रेस या अन्य कोई दल क्यों नहीं?
आपके बागी राज्य सभा सदस्यों ने भाजपा ही क्यों चुना, कांग्रेस या अन्य कोई दल क्यों नहीं चुना इस पर भाजपा छोड़ सभी को मंथन करना चाहिए। विरोधी दल आरोप लगा सकते है कि “ऑपरेशन लोटस” का असर है। प्रमाण में आप से भाजपा में प्रवेश करने वाले राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के यहां ईडी के छापे की चर्चा है। दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कि उनकी नीति से प्रभावित होकर कोई प्रवेश कर रहा है तो ये उनकी पार्टी की सफलता है।
