सारा अली खान और सनातन धर्म अमृता सिंह और सैफ अली खान की बेटी सारा अली खान,केदारनाथ फिल्म की नायिका थी। इस फिल्म निर्माण के दौर में सारा अली खान की आस्था देश के स्थापित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ के प्रति आस्था इतनी गहरी हुई कि सारा अली खान हर साल केदारनाथ के दर्शन को जाने लगी। पिछले साल तक सब कुछ सामान्य रहा।इस साल बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष ने ये अनिवार्यता कर दिया कि केवल सनातन धर्म के प्रति आस्था रखने वाले हिंदू ही बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर में प्रवेश दर्शन कर पाएंगे।इस नियम से ये भी तय हो गया है कि गैर हिन्दू या गैर सनातनी इन मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। हिंदुस्तान के संविधान में 1977 तक धर्म के प्रति सापेक्षता या निरपेक्षता मौन ही थी लेकिन 42 वें संशोधन में “धर्म निरपेक्ष” शब्द जुड़ गया। दरअसल दो देशों को आजादी धर्म और संप्रदाय के आधार पर हुआ था।ये शर्त एक्छिक भी थी कि दोनों धर्म और संप्रदाय के लोग चाहे तो दोनों देश में रह सकते है। ये केवल कागजी घोषणा साबित हुई। सांप्रदायिक दंगे में भारी जान माल की हानि हुई। इंसानियत के चीथड़े उड़ गए।मानवता का लहू इतना बहा कि दिल और दिमाग में एक विभाजन रेखा खींची हुई है। जब जब पाकिस्तान के लोग हिंदुस्तान में मानवता को लहू लुहान करते है। वैमनस्यता घृणा में बदलने लगती है। पिछले कुछ सालों में देश के चरित्र में फर्क आया और दो बार दुश्मनों के घर में घुस कर तगड़ा जवाब दिया गया।

जम्मू कश्मीर में घटित दो घटनाओं के अलावा देश में बढ़ते तीव्र हिंदुत्व के चलते धर्म के आधार पर कड़े निर्णय लिए जा रहे है जिसमें से एक निर्णय देश के स्थापित मंदिरों में केवल सनातनियों का प्रवेश है। आमतौर पर धर्म पर आस्था रखने वाले संप्रदाय के लोग अपने अपने धार्मिक स्थलों में पूजा उपासना करते है।अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों में अगर प्रवेश करते भी है तो भक्ति और भक्त के बजाय पर्यटक ज्यादा होते है। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर इस बात का उदाहरण है।प्रवेश के नियम भी है।बंदिश नहीं है।इसके पलट मुस्लिम धर्म के उपासना स्थलों में गैर मुस्लिमों का प्रवेश निषेध है। उनके इबादत की पृथक रीति रिवाज है जिसका पालन दीगर धर्म का व्यक्ति नहीं कर सकता है। सनातनी धर्म व्यवस्था में पूजा उपासना में केवल दर्शन और प्रार्थना निहित है। वह भी बहुत कम समय के लिए क्योंकि दर्शनार्थियों की संख्या लाखों में होती है। दरअसल धार्मिक स्थलों में गैर धर्मो के निषेध का चिंतन का केंद्र मुस्लिम धर्म के पवित्र तीर्थ स्थल मक्का मदीना है।इसके चलते अन्य धर्म वाले भी अपने अपने पूजा उपासना केंद्रों में प्रतिबंध लगा रहे है। सामान्य तौर पर कोई भी धर्म समर्थक अन्य धर्म के पूजा उपासना स्थलों में कदाचित ही जाता है जब तक वह किसी गंभीर संकट में न पड़ जाए। ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिलते है जब एक धर्म से जुड़ा व्यक्ति अपने ऊपर आए संकट के निदान के लिए मत्था भी टेकता है और मन्नत के धागे भी बंधवाता है। बहरहाल सारा अली खान की मां जो हिंदू या सनातनी है सिक्ख धर्म से ताल्लुक रखती है। सैफ अली खान के साथ निकाह पढ़ने के लिए उनका नाम “अजीजा” रखा गया था।उनका सैफ अली खान से अलगाव हो चुका है। ऐसी स्थिति में अमृता सिंह सनातनी ही मानी जाएंगी। सारा के साथ अली खान शब्द जुड़ा हुआ है ऐसे में केदारनाथ यात्रा के लिए उन्हें शपथ देने की विवशता होगी। प्रश्न ये भी उठता है कि अगर सारा अली खान जैसे अन्य लोग सनातनी होने का शपथ पत्र देते है तो क्या बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति उन्हें भी इजाजत देगी?
