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    Home»Featured»विराट व्यक्तित्व – भगतसिंहभगत सिंह
    Featured

    विराट व्यक्तित्व – भगतसिंहभगत सिंह

    Sanjay DubeyBy Sanjay DubeySeptember 28, 2025Updated:October 2, 2025No Comments3 Mins Read2 Views
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    विराट व्यक्तित्व – भगतसिंहभगत सिंह, नाम सुनते ही एक विराट व्यक्तित्व आंखों के सामने खड़ा हो जाता है।ये व्यक्तित्व निर्भीकता का परिचायक है। बेखौफ जीवन जीने और दुश्मनों की नींद हराम कर देने वाले युवा थे भगत सिंह। जिस दौर में भगत सिंह ने अपनी जान देश के लिए कुर्बान कर दिया उस उम्र में अधिकांश युवा अपने निहित स्वार्थ के लिए पैसे कमाने के लिए रोजगार ढूंढते है। उस जमाने में भगत सिंह के उम्र के सामान्य लोग परिवार बसाने के लिए भी तत्पर रहते थे। स्वयं भगत सिंह की भी शादी होने वाली थी लेकिन उन्होंने। मातृभूमि की सेवा करना बेहतर समझा।भगतसिंह आज़ादी के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार थे यहां तक कि अपनी जान भी गवा दी। उनके बलिदान को पूरा देश मानता है जानता है। वे देश के ऐसे युवा है जिन्हें विवेकानंद के आध्यात्म के बराबर ही शौर्य के लिए व्यक्तिगत सम्मान मिलता हैं।देश की आज़ादी भगतसिंह के त्याग के बिना मिलना कठिन थी क्योंकि वे अंग्रेजो के दोगलेपन को समझते थे। डर के आगे जीत है ये उनकी विचारधारा थी। हममे से बहुत कम लोगो को इस बात की जानकारी है कि भगतसिंह श्रेष्ठ पाठक और वक्ता भी थे। क्रांति के विषय पर उन्होंने जेल में हज़ारों पन्ने लिखे थे जिसे अंग्रेजों ने इस डर से आग के हवाले कर दिया था कि यदि भगतसिंह के विचार पुस्तक के रूप में जनता में आ जाती तो अंग्रेजों को भगतसिंह के जीते जी देश छोड़ना पड़ जाता। भगतसिंह के बलिदान को जितनी लोकप्रियता मिलनी थी नही मिली लेकिन उन्हें भुलाया भी नही जा सका। वे साहित्य में जिंदा रहे,लोगो के मन मे जिंदा रहे। देश की आजादी के बाद भगत सिंह को गुमनामी में धकेलने के लाख प्रयास हुए। लेकिन सूर्य के तेज को कौन रोक सका। “शहीद” केवल कश्यप और एस राम शर्मा के द्वारा बनाई गई थी। इस फिल्म देखने के बाद ही जय जवान जय किसान के मुद्दे पर फिल्म बनाने का सुझाव दिया था।कालांतर ने जब भी समाज मे परिवर्तन के लिए शांति के बजाय क्रांति की विचारधारा पनपी तब तब भगतसिंह पर्याय बने। देश के लगभग हर शहरों में उनकी प्रतिमा और उनके नाम की सड़कें ये बताती है कि भगतसिंह को याद करवाने के लिए आज़ादी के बाद लोगो ने स्वयंस्फूर्त कितना काम किया। पंजाब में भगतसिंह हर व्यक्ति के मन मे एक गर्वीला व्यक्तित्व है । गुरु गोविंद सिंह के द्वारा समाज के कमजोर वर्ग की सुरक्षा के लिए पगड़ी धारण करने वाले सिक्खों के प्रति सारा देश सम्मान रखते है। पंजाब में जब आप पार्टी को बहुमत मिला तो सरदार भगतसिंह के जन्म स्थली में जाकर आप पार्टी के मुख्यमंत्री भगवत सिंह मान का शपथ ग्रहण किया।ये कार्य भगतसिंह के साथ साथ उनके करोड़ो अनुयाइयों के लिए गर्व और सम्मान की बात है। भगतसिंह ने कहा था ” मैं रहूं या न रहूं पर मैं रहूंगा हवाओ में “। ये बात आज भी महसूस होती है।

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