Close Menu

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    What's Hot

    Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah chairs a security review meeting

    February 9, 2026

    युवा विजेता क्रिकेट टीम और भविष्य

    February 7, 2026

    धान में धन,धना धन

    January 20, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    भारतीय PRESS
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Subscribe Monday, March 2
    • होम
    • समाचार
      • आर्थिक
      • अपराध
      • राजनीतिक
      • सामाजिक
    • लेखन
      • आलेख
      • चिंतन
      • कहानी
      • कविता
      • विश्लेषण
      • व्यंग
    • इल्मी-फिल्मी
      • इतिहास
      • कला
      • पुरस्कार
      • समीक्षा
      • धार्मिक संस्कृति
    • तंदुरुस्ती
      • खेल
      • खिलाड़ी
      • योग
    • तकनीकी
    • फोटो
    • वीडियो
    • हमारे बारे में
      • विचार
      • टीम
      • संपर्क
      • कंपनी प्रोफाइल
    • English
      • Art and Culture
      • Political
      • Religion
      • Social
    भारतीय PRESS
    Home»लेखन»आलेख»तानाशाह नहीं हैं मोदी !
    आलेख

    तानाशाह नहीं हैं मोदी !

    Prof.(Dr.) Sanjay DwivediBy Prof.(Dr.) Sanjay DwivediAugust 16, 2024Updated:August 18, 2024No Comments8 Mins Read3 Views
    Facebook Twitter Pinterest Telegram LinkedIn Tumblr Copy Link Email
    Follow Us
    Google News Flipboard
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

    तानाशाह नहीं हैं मोदी !

    आलोचकों की परवाह न कर अपनी राह चलते हैं प्रधानमंत्री

          प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कुछ तो खास है कि वे अपने विरोधियों के निशाने पर ही रहते हैं। इसका खास कारण है कि वे अपनी विचारधारा को लेकर स्पष्ट हैं और लीपापोती, समझौते की राजनीति उन्हें नहीं आती। राष्ट्रहित में वे किसी के साथ भी चल सकते हैं, समन्वय बना सकते हैं, किंतु विचारधारा से समझौता उन्हें स्वीकार नहीं है। उनकी वैचारिकी भारतबोध, हिंदुत्व के समावेशी विचारों और भारत को सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की अवधारणा से प्रेरित है। यह गजब है कि पार्टी के भीतर अपने आलोचकों पर भी उन्होंने कभी अनुशासन की गाज नहीं गिरने दी,यह अलग बात है कि उनके आलोचक राजनेता ऊबकर पार्टी छोड़ चले जाएं। उन्हें विरोधियों को नजरंदाज करने और आलोचनाओं पर ध्यान न देने में महारत हासिल है। इसके उलट पार्टी से नाराज होकर गए अनेक लोगों को दल में वापस लाकर उन्हें सम्मान देने के अनेक उदाहरणों से मोदी चकित भी करते हैं।
        किसी व्यक्ति की लोकतांत्रिकता उसकी अपने दल के साथियों से किए जा रहे व्यवहार से आंकी जाती है। मोदी यहां चौंकाते हुए नजर आते हैं। वे दल के सर्वोच्च नेता हैं किंतु उनका व्यवहार ‘आलाकमान’ सरीखा नहीं है। आप उन्हें तानाशाह भले कहें, किंतु तटस्थ विश्लेषण से पता चलता है कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद आजतक उनकी आलोचना करने वाले अपने किसी साथी के विरूद्ध उन्होंने कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होने दी। कल्पना करें कि किसी अन्य दल में अपने आलाकमान या सर्वोच्च नेता की आलोचना करने वाला व्यक्ति कितनी देर तक अपनी पार्टी में रह सकता है। नरेंद्र मोदी यहां भी रिकार्ड बनाते हैं। जबकि भाजपा में अनुशासन को लेकर कड़ी कारवाईयां होती रही हैं। भाजपा और जनसंघ के दिग्गज नेताओं में शामिल रहे बलराज मधोक से लेकर कल्याण सिंह, उमा भारती, बाबूलाल मरांडी, बीएस येदुरप्पा जैसे दिग्गजों पर कार्रवाइयां हुई हैं, तो गोविंदाचार्य पर भी एक कथित बयान को लेकर गाज गिरी। उन्हें अध्ययन अवकाश पर भेजा गया, जहां से आजतक उनकी वापसी नहीं हो सकी है। मोदी का ट्रैक अलग है। वे आलोचनाओं से घबराते नहीं और पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की छूट देते हुए अपने आलोचकों को भरपूर अवसर देते हैं।
    
        यह कहा जा सकता है कि मोदी आलोचनाओं के केंद्र में रहे हैं, इसलिए इसकी बहुत परवाह नहीं करते हैं। वे कहते भी रहे हैं कि उनके निंदक जो पत्थर उनकी ओर फेंकते हैं, उससे वे अपने लिए सीढ़ियां तैयार कर लेते हैं। 2014 में उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद पार्टी के भीतर भी उनके आलोचकों और निंदकों की पूरी फौज सामने आती है, जो तमाम मुद्दों पर उन्हें घेरती रही है। आश्चर्यजनक रूप से मोदी उनके विरूद्ध पार्टी के अनुशासन तोड़ने जैसी कार्यवाही भी नहीं होने देते हैं। इसमें पहला नाम गाँधी परिवार से आने वाले वरूण गांधी का है, जिन्हें भाजपा ने सत्ता में आने के बाद संगठन में महासचिव का पद दिया। वे सांसद भी चुने गए। किंतु पार्टी संगठन में उनकी निष्क्रियता से महासचिव का पद चला गया और वे मोदी के मुखर आलोचक हो गए। अपने बयानों और लेखों से मोदी को घेरते रहे। बावजूद इसके न सिर्फ उनको 2019 में भी लोकसभा का टिकट मिला, बल्कि आज भी वे पार्टी के सदस्य हैं। खुलेआम आलोचनाओं और अखबारों में लेखन के बाद भी उन्हें आज तक एक नोटिस तक पार्टी ने नहीं दिया है। हां, इस बार वे टिकट से जरूर वंचित हो गए। उनकी जगह कांग्रेस से आए जितिन प्रसाद को पीलीभीत से लोकसभा का टिकट मिल गया। जतिन जीत भी गए।
        दूसरा उदाहरण फिल्म अभिनेता और अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रहे शत्रुध्न सिन्हा का है। सिन्हा मोदी के मुखर आलोचक रहे और समय-समय पर सरकार पर टिप्पणी करते रहे। अंततः वे भाजपा छोड़कर पहले कांग्रेस, फिर तृणमूल कांग्रेस में चले गए। अब वे आसनसोल से तृणमूल के सांसद हैं। यही कहानी पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की है। उन्होंने भी मोदी विरोधी सुर अलापे और अंततः पार्टी छोड़कर चले गए। उनके पार्टी छोड़ने के बाद भी उनके बेटे जयंत सिन्हा को 2019 में भाजपा ने लोकसभा की टिकट दी। जयंत सिन्हा मोदी सरकार में मंत्री भी रहे। इस बार जयंत का टिकट कट गया। ऐसे ही उदाहरणों में क्रिकेटर कीर्ति आजाद भी हैं। मोदी सरकार के विरूद्ध उनके बयान चर्चा में रहे, संप्रति वे तृणमूल कांग्रेस के साथ हैं। 
      लेखक और दिग्गज पत्रकार अरूण शौरी, अटल जी की सरकार में मंत्री रहे। उनका बौद्धिक कद बहुत बड़ा है। एक इंटरव्यू में अरुण शौरी ने कहा कि “नरेंद्र मोदी के बारे में उनके अधिकारी ही मुझे कहते हैं कि उनके सामने बोल नहीं सकते। मंत्री डरे हुए रहते हैं। कोई कुछ बोल नहीं पाता है उनके सामने। उनके सामने जाने और कुछ भी कहने से पहले लोग डरे रहते हैं और सोच समझकर बोलते हैं। हालांकि अटल जी की पर्सनालिटी ऐसी थी कि लोग उनसे अपनी बात कहना चाहते थे और वह सुनते भी थे। उनकी एक खास बात यह भी थी कि वह भी यह जानना चाहते थे कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वह पूछा करते थे और लोग बिना किसी डर के बताते भी थे।” तीखी आलोचनाओं के बाद भी मोदी का उनके प्रति सौजन्य कम नहीं हुआ और वे शौरी की बीमारी में उन्हें देखने अस्पताल जा पहुंचे और उनके परिजनों से भी मुलाकात की। अरुण शौरी और पीएम मोदी के रिश्तों में उस समय सबसे ज्यादा खटास देखी गई, जब अरुण शौरी यशवंत सिन्हा के साथ राफेल मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंच गए। यहां पर उन्होंने मामले की जांच और सौदे पर सवाल उठाए थे । हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सरकार को क्लीन चिट मिल गई। रिश्तों में आई खटास के बावजूद भी पीएम मोदी ने पुणे स्थित अस्पताल में अरूण शौरी से मुलाकात की। इस मुलाकात के फोटो शेयर करते हुए लिखा- “आज पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी जी से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। उनके साथ इस दौरान बहुत अच्छी बातचीत हुई। हम उनकी दीर्घायु और स्वस्थ्य जीवन की कामना करते हैं।”
       अपने तीखे तेवरों के चर्चित सुब्रमण्यम स्वामी कभी जनसंघ- भाजपा से जुड़े रहे। बाद में वे भाजपा से अलग होकर जनता पार्टी के अध्यक्ष बने। केंद्र में मंत्री भी बने। 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी ने स्वामी को राज्यसभा के लिए भेजा। स्वामी इससे कुछ अधिक चाहते थे। जाहिर है इन दिनों वे मोदी के प्रखर आलोचक बने हुए हैं। किंतु उनकी आलोचनाओं पर मोदी या भाजपा ने कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। एक साक्षात्कार में स्वामी ने कहा कि “मैं बीजेपी का हिस्सा हूं...मैं इनके साथ लंबे समय से साथ हूं। मुझे पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी से भी दिक्कत थी लेकिन इतनी समस्या नहीं थी, जितनी कि पीएम नरेंद्र मोदी से है।”

    भाजपा छोड़कर जा चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान को वापस लाकर मोदी ने उन्हें केरल के राज्यपाल पद से नवाजा। राज्यपाल के पद पर बैठकर मोदी की आलोचना करते रहे सतपाल मलिक को भी प्रधानमंत्री पद से नहीं हटाते, बल्कि कार्यकाल पूरा करने का अवसर देते हैं। जबकि राज्यपाल एक संवैधानिक पद है और उस पद पर बैठे व्यक्ति को केंद्र सरकार की सार्वजनिक आलोचना से बचना चाहिए। किंतु सतपाल मलिक ऐसा करते रहे और मोदी उनकी सुनते रहे। इसी तरह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी नाराज होकर पार्टी से बाहर थे और अपनी पार्टी बनाकर सक्रिय थे। भाजपा ने मोदी के कार्यकाल में न सिर्फ उनकी पार्टी में वापसी सुनिश्चित की बल्कि उन्हें झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी दिया। नाराज होकर भाजपा दो बार छोड़ चुके कल्याण सिंह( अब स्वर्गीय) को राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया। उनके पुत्र राजबीर को लोकसभा की टिकट और पौत्र संदीप सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री का पद मिला है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती भी ‘भाजपा के अनुशासन चक्र’ का शिकार रहीं। मोदी ने उन्हें अपनी सरकार में मंत्री बनाया और उनके साथ भाजपा छोड़कर गए प्रह्लाद सिंह पटेल मोदी सरकार में राज्यमंत्री बने। अब पटेल मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। ये उदाहरण बताते हैं मोदी अपने लोगों के प्रति खासे उदार हैं। वे अपनी ‘निजी आलोचना’ की बहुत परवाह नहीं करते और गांठ नहीं बांधते। निजी रिश्तों को राजनीति से ऊपर रखते हैं। वे शरद पवार के अभिनंदन समारोह में शामिल हो सकते हैं, मुलायम सिंह यादव के परिवार में आयोजित विवाह समारोह में भी इटावा भी जा सकते हैं। उनकी ताकत है कि वे कश्मीर में महबूबा मुफ्ती के साथ भाजपा की सरकार बनाने की अनुमति दे सकते हैं। राजनीतिक समझ-बूझ के साथ अपने वैचारिक आग्रहों पर डटे रहना मोदी की विशेषता है। इसलिए वे भारतीय राजनीति की पिच पर आज भी मजबूती से जमे हुए हैं।

    प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी,
    पूर्व महानिदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, नई दिल्ली

    Follow on Google News Follow on Flipboard
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Email Copy Link
    Prof.(Dr.) Sanjay Dwivedi

    Related Posts

    गोवर्धन और पूजा

    October 22, 2025

    विराट व्यक्तित्व – भगतसिंहभगत सिंह

    September 28, 2025

    क्या हम कठिनतम जिंदगी को जीने पर मजबूर होते जा रहे है?

    September 27, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    Demo
    Top Posts

    भारतीय पत्रकारिता महोत्सव

    June 24, 2024265 Views

    Power struggle or policy stagnation?

    August 14, 2024133 Views

    भारतीय PRESS

    June 1, 2024125 Views

    Dushasan

    June 16, 2024111 Views
    Don't Miss

    Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah chairs a security review meeting

    February 9, 20263 Mins Read2 Views

    Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah chairs a security review meeting…

    युवा विजेता क्रिकेट टीम और भविष्य

    February 7, 2026

    धान में धन,धना धन

    January 20, 2026

    Chhattisgarh Investor Connect begins

    November 26, 2025
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from SmartMag about art & design.

    Demo
    About Us
    About Us

    भारतीय प्रेस – विचारो की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के लिए एक ऐसा प्लेटफार्म है जो देश विदेश में रहने वालो के विचार लेखन के लिए अपनी जगह है। यहां न उम्र की सीमा है न जाति का बंधन है न ही लिंग भेद है, न धर्म का रोड़ा है।सबके हाथ में अगर कलम है तो उन्हें अभिव्यक्त होने का भी अधिकार है।

    Email Us: bharatiyapress@gmail.com
    Contact: +91 9109031157

    Facebook Instagram WhatsApp
    Our Picks

    Union Home Minister and Minister of Cooperation Shri Amit Shah chairs a security review meeting

    February 9, 2026

    युवा विजेता क्रिकेट टीम और भविष्य

    February 7, 2026

    धान में धन,धना धन

    January 20, 2026
    Most Popular

    सोरेन का अनर्गल प्रलाप निंदनीय है

    June 30, 20240 Views

    पिता की अहमियत

    July 25, 20240 Views

    स्वच्छ्ता की अलख – पीएसआई-इंडिया सम्मानित

    August 28, 20240 Views
    • होम
    • समाचार
    • लेखन
    • इल्मी-फिल्मी
    • तंदुरुस्ती
    • तकनीकी
    • हमारे बारे में
    © 2026 Mitaan India Media Pvt. Ltd. | All Rights Reserved.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.