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Author: mitaanindiamedia
क्या क्रिकेट में “विराट” युग का अंत करीब है!
क्या क्रिकेट में “विराट” युग का अंत करीब है!1932से लेकर 2025 तक भारत की ओर से खिलाड़ियों ने देश का प्रतिनिधित्व किया है।इनमें से खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने । खिलाड़ियों और कप्तानों में बहुत चुनिंदा नाम है जिनके नाम के आगे सफलता और असफलता भी जुड़ी हुई है।भारतीय क्रिकेट को एक खिलाड़ी दो युगों के बीच बांटते है वे है सुनील गावस्कर।गावस्कर भारत सहित दुनियां के पहले बल्लेबाज रहे जिन्होंने अपने युग में सबसे पहले दस हजार रन के आंकड़े को छुआ था। टेस्ट खेलने के मामले 100वे टेस्ट की सीमा रेखा को पार कर 125टेस्ट खेले…
रोम,रोम में राम बसे
रोम,रोम में राम बसेभारत देश सहित दुनियां में लगभग सभी सुधि लोगों के लिए राम का नाम सर्वव्याप्त है। दो अक्षर के नाम की स्वीकार्यता इतनी है कि इस नाम के जीवन के अंतिम क्षणों में स्मरण करने से सारे पाप से मुक्त होने का विश्वास है।इस नाम को हिंदू धर्म और संस्कृति में ईश्वर और व्यक्ति दोनों रूप में में स्वीकृति मिली हुई है। वाल्मीकि ने रामायण ग्रन्थ में राम को ईश्वर के रूप में स्थापित किया। वाल्मीकि द्वारा देव भाषा संस्कृत में लिखे रामायण का अवधि भाषा में अनुवाद किया। दोनों ही ग्रन्थ में विचार और दृष्टिकोण में…
दे दनादन छक्का छक्का और छक्का
दे दनादन छक्का छक्का और छक्काकरीब46साल पहले भारतीय क्रिकेट टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई थी। इस टीम में एक ऐसा खिलाड़ी भी शामिल हुआ था जो तेज गेंदबाज के रूप में शामिल हुआ था। बैटिंग भी कर लेता था। एक टेस्ट में ताबड़तोड़ छक्के जड़ दिए। बड़ा गुमान था कि टीम का कप्तान शाबाशी देगा। हुआ उल्टा कप्तान ने डांट लगाई कि ऐसा कोई क्रिकेट खेलता है? पांच साल बाद इसी खिलाड़ी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे एक दिवसीय विश्व कप क्रिकेट में 175 रन नाबाद की पारी खेली। छह छक्के जड़े। ये खिलाड़ी था कपिल देव ।यही से…
100टेस्ट खेलने वाले 81 धुरंधर
100टेस्ट खेलने वाले 81 धुरंधरक्रिकेट में सौ रन के आंकड़े को किसी बल्लेबाज के एकाग्रता, संपर्पण और संघर्ष का प्रमाण माना जाता है। यदि कोई क्रिकेट खिलाड़ी इसी आंकड़े को टेस्ट खेलने में छू ले या पार कर ले तो ऐसा खिलाड़ी विलक्षण माना जाता है। एक सौ सैंतालीस साल में कुल जमा 2849 खिलाड़ी टेस्ट खेले है।इनमें से केवल इक्यासी खिलाड़ी ऐसे है जिन्होंने सौ टेस्ट खेलने का कीर्तिमान बनाया है।इंग्लैंड के गॉडफ्रे इवान सर्वाधिक 91 टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ी थे।उनको इंग्लैंड के ही कॉलिन काउंड्रे पार कर 11जुलाई 1968को सौ टेस्ट खेलने पहले खिलाड़ी बने। काउंड्रे इंग्लैंड के…
सुबह और शाम काम ही काम
सुबह और शाम काम ही काम इन्फोसिस कंपनी के संस्थापक कृष्णमूर्ति ने देश को विकसित बनाने के लिए युवाओं से सप्ताह में सत्तर घंटे काम का आव्हान किया। इसके बाद काम के घंटे को लेकर बहस जारी है। अदाणी के ये कहने पर कि हर दिन अवकाश को छोड़कर बारह घंटे काम करने पर बीबी छोड़ देगी।परस्पर विरोधाभास की स्थिति बनी है। काम के घंटे कितने हो और कितने है,ये बड़ी रोचक बात है। देश दुनियां में मानसिक और शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति है। मानसिक श्रम करने वालो के पास कार्य स्थल शारीरिक रूप से कार्य करने वालों की…
उज्ज्वल दीपक यंग लीडर्स अवार्ड से सम्मानित
भाजपा के युवा नेता उज्ज्वल दीपक को राजनीति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान, नेतृत्व क्षमता और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों के लिए ऋषिहुड यूनिवर्सिटी द्वारा प्रतिष्ठित यंग लीडर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम ऋषिहुड यूनिवर्सिटी सोनीपत द्वारा दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया था। भारत सरकार के पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु और प्रसिद्ध उद्योगपति श्री अजय पीरामल जी द्वारा यह अवार्ड उज्ज्वल दीपक को प्रदान किया गया। “यंग लीडर्स अवार्ड से सम्मानित करने के लिए मैं पूरे विश्वविद्यालय परिवार का आभारी हूँ। मुझे प्रसन्नता है की मेरे द्वारा किए जा…
पितृ दिवस
आज पितृ दिवस हैअनेक पिता को अपने पिता होने पर गर्व हो सकता है कि उन्होंने अपना सारा जीवन बच्चो के जीवन बनाने में लगा दिया।आज उनके बच्चे मेट्रो में काम कर रहे है। ये भी गर्व का विषय होगा। ऐसे गर्वीले पिता को बधाई,सच ये भी है कि आज का युग संवेदना का युग नही रह गया है।व्यवहारिक समय है, अर्थ का अनुसंधान सर्वप्राथम्य है। इसके बाद युवा जीवन है,जिसकी अपनी प्राथमिकता है। एक माइक्रो परिवार है।जिसमे मैं, मेरी पत्नी और मेरा बच्चा है।यहां पर आपका पुत्र भी पिता है और उसकी भी वही बाध्यता है जो आपकी पिता…
भारतीय PRESS
हम भारतीय है, कही भी हो हम भारतीय है क्योंकि भारत हममें बसता है, हमारे दिल में धडकता है।हमारे धमनियों में बहता है। भारतीय होने का एक अहसास भी है अभिव्यक्त होने का,हममें से अधिकांश लोगो की एक कमी है और खूबी भी है कि हम केवल बोले हुए शब्दो में अभिव्यक्त होते है। अपने परिवार में, अपने संबंधियों में, अपने दोस्तो में, अपने परिचितों में बोले हुए शब्द ही कहे सुने जाते है।सदियों से बोल कर बताने समझाने का चलते रहा है। जनश्रुत से बढ़ते बढ़ते हम लिखने पढ़ने की परंपरा के सहभागी बने और कालांतर में एक साथ…