धरम पा जी फिल्मची, ये शब्द देश के हर उस फिल्म प्रेमी को कहा जा सकता है जिसके पास अपने जमाने में मनोरंजन के नाम पर केवल फिल्मे ही हुआ करती थी।ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के दौर से लेकर कलरफुल फिल्मों के सफर में नायक प्रधान फिल्मे ही बनती थी।समय के साथ सामाजिक विषयों ने करवटें बदली। परिवार और समाज से निकल कर नये विषय सामने आने लगे। ऐसे में परंपरागत नायकों की जगह ऐसे नायकों की जरूरत पड़ने लगी चेहरे में भले भाव न हो,अंग परिभाषाएं न बोलते हो नाचना भले आता हो लेकिन कद काठी में हीमेन दिखे, एक हीमेन मिल गया जिसे तब से लेकर सदियों तक धर्मेन्दर या धर्मेंद्र के नाम से जाना जाएगा। ये कलाकार स्थापित दिलीप कुमार,राज कुमार, राज कपूर देवानंद जैसे स्थापित कलाकार नहीं था। इसके बावजूद इसमें एक बात थी कि वे बहुत मेहनतकश रहे, अनुशासित रहे। उन्होंने निर्माताओं निर्देशकों की बात मानी। फिल्मे चली या नहीं चली इससे धमेंद्र को कभी फिक्र नहीं पड़ा।

दिल भी तेरा हम भी तेरा धर्मेंद्र की पहली फिल्म थी।इसके बाद सामाजिक विषयों की फिल्मों के धर्मेंद्र अनपढ़, काजल, ममता, आए दिन बहार के, जीवन मृत्यु, देवर जैसी फिल्मे की समय के साथ अपराध जगत का आगमन हुआ और धर्मेंद्र ऐसे फिल्मों के नायक बने जिसमें कद काठी की जरूरत थी। चोर बने, डाकू बने।शोले, दो चोर, चरस,लोफर,ड्रीम गर्ल, राम धर्मवीर, बलराम,इंटरनेशनल क्रुक, के नायक बने इस दौर में धर्मेंद्र के भीतर का हीमेन मरा भी और एक संवेदन शील अभिनेता ने जन्म लिया। जीवन मृत्यु, सत्यकाम, चुपके चुपके, जैसे फिल्मों में अभिनय भी किया। कुछ शख्सियत के बिना धर्मेंद्र की जिंदगी अधूरी मानी जा सकती है। उनके परिवार के दो बेटे सनी और बॉबी देओल है तो दूसरा परिवार हेमा मालिनी का रहा। कद काठी के धनवान धर्मेंद्र ने रील लाइफ की नायिका को रियल लाइफ की हीरोइन बनाया। 44फिल्मे साथ में की। जो ड्रीम गर्ल दुनियां में राज की वह हकीकत में धर्मेंद्र की ड्रीम कम ट्रू रही। एक सहज ,सरल इंसान के रूप में धर्मेंद्र ने अपनी इमेज बनाया था। किसान परिवार से थे सो अपने जीवन के उत्तरार्ध में किसान बन फार्म हाउस में रहे। कल नश्वर शरीर के पंचतत्व में विलीन होने का समय भी आया। समग्र उम्र जी लेने के बाद गाड़ी बुला है, सिटी बजा रही है ।
