1983 विश्व कप के एक नायक:मदन लाल बनाम मदद लाल हिंदुस्तान क्रिकेट के सफर में अगर मील का पत्थर का देखे तो 1983 का साल ऐसा साल रहा जहां से क्रिकेट खेलने वाले देशों ने माना कि प्रतिभा हिंदुस्तान में भी है। ये साल कपिलदेव की उस टीम का साल था जिसने वेस्ट इंडीज टीम के वनडे विश्वविजेता होने के हैट्रिक को रोका था। टीम खेल में व्यक्तिगत प्रतिभाएं भी ऐसी होती है जो जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। 1983 के विश्व विजेता हिंदुस्तान की टीम में मदनलाल ऐसे खिलाडी रहे जिन्होंने पहले जिम्बाब्वे फिर ऑस्ट्रेलिया और अंत में वेस्टइंडीज को पराजय के द्वार पर खड़ा कर दिया।

मदनलाल, तब के जमाने में मध्यम तेज गेंदबाज हुआ करते थे जब देश में तेज गेंदबाजो का अकाल हुआ करता था। इसी कारण तीसरे एक दिवसीय विश्व कप टूर्नामेंट के लिए टीम बनी तो मदन लाल भी चयनित हुए। अपने चयन को मदन लाल ने साबित भी किया और निर्णायक मैचों में विकेट लेकर देश को विश्व विजेता बनाने में मदद लाल भी बने। तीसरे एक दिवसीय विश्वकप फाइनल में साठ ओवर में 183 रन का लक्ष्य वेस्ट इंडीज टीम के लिए सशक्त बल्लेबाजों के रहते साधारण काम था। वेस्ट इंडीज टीम में सबसे खतरनाक बल्लेबाज विव रिचर्ड्स माने जाते थे। धुंआधार बैटिंग के लिए विख्यात और कुख्यात दोनों थे। विकेट पर आते ही तेजी से रन बनाकर हिंदुस्तान के लोगों के सांस रोक दिए थे। ऐसे में मदन लाल बनाम मदद लाल ने कप्तान कपिल देव से बॉल छीनकर बॉलिंग की।इसी ओवर में मदन लाल की बॉल पर कपिलदेव ने अविस्मरणीय कैच पकड़ कर देश को जीत की ओर बढ़ा दिया था। मदन लाल ने 12 ओवर में 2 ओवर मेडन फेंके, सिर्फ 31 रन देकर रिचर्ड्स, डेसमंड हैंस और लैरी गोम्स का महत्वपूर्ण विकेट लेकर देश को विश्व विजेता बना कर ही दम लिया। 72 बाल में केवल 31 रन देना बताता है कि कितनी सधी गेंदबाजी की गई थी।आज मदन लाल 75 साल के होने जा रहे है। उनके खाते में 39 टेस्ट और 67 वनडे है। प्रथम श्रेणी के मैच में मदन लाल 22 शतक के मदद से दस हजार दो सौ चार रन बनाए है। टेस्ट में 71 और वनडे में 67 विकेट उनके खाते में है। 2026 में जब सूर्य कुमार यादव की कप्तानी में हिंदुस्तान टीम ने टी ट्वेंटी टूर्नामेंट जीता तो 1983 के सारे महानायक आंखों के सामने घूम गए। वह कैच में दिखा जिसमें मदन लाल की बॉल पर कपिल देव ने अदभुद कैच पकड़ा था।
संजय दुबे 🖋️
