बासी सरकार की बोरे योजना हर राजनैतिक दल सत्ता प्राप्त करने के लिए कल्याणकारी योजनाएं परोसती है। छत्तीसगढ़ में पंद्रह साल से सत्ता में रहे भाजपा को हराने के लिए 2018में छत्तीसगढ़ी संस्कृति का फ्लेवर लेकर कांग्रेस आई थी। जनमत भी भरपूर मिला।सरकार बनी।उम्मीद थी कि जनहित में काम कर कम से कम एक दशक तो सरकार रहेगी और मिसाल कायम करेगी। पांच साल मे ही सरकार ने भ्रष्ट्राचार के ऐसे मापदंड स्थापित किए की सारे प्रतिमान टूट गए। एक भी ऐसा शासकीय विभाग नहीं है जिसमें भ्रष्टाचार का चरम नहीं हुआ है। ये भी कहा जाता है , माना जाता है कि विष्णु देव साय की सरकार का पहला कार्यकाल पुरानी सरकार के भ्रष्ट्राचार के जांच में ही निकल जाएगा।आबकारी, राजस्व ,खाद्य, खनन, लोक सेवा आयोग के मामले में केंद्र और राज्य की सारी जांच एजेंसी जांच कर रही है।एक नया विभाग जांच के दायरे में आया है श्रम विभाग। पिछली सरकार ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण संस्कृति के जरिए गांव में पैठ बनाने की बेहतर शुरुआत की थी।किसानों को धान के बदले सम्मानजनक राशि देकर सराहनीय कार्य किया था।इसके बाद ग्रामीण संस्कृति के आड में भ्रष्ट्राचार की सारी सीमाएं लांघ दिए। श्रम विभाग का एक नया घोटाला सामने आया है। बोरे बासी योजना। छत्तीसगढ़ गर्म प्रदेश है। मई का महीना तो आग उगलता है।इस मौसम में शरीर को पानी की आवश्यकता ज्यादा पड़ती है।इस कारण गांव में श्रमिक घर से निकलने से पहले रात को बने चांवल को सुबह पानी में बोर दिया जाता है। इसे बोरे बासी कहा जाता है। इसके साथ प्याज, आचार के जरिए शरीर में गर्मी से बचने की शक्ति का घरेलू तरीका है। इस भोजन को राज्य स्तरीय प्रतिष्ठा दिलाने के लिए श्रम दिवस याने एक मई को बोरे बासी खाने का काम शुरू हुआ। इसी के आड में राज्य को बोरने का काम शुरू हुआ।प्रचार ऐसा हुआ मानो सरकार श्रम बिंदु की तरफदार है लेकिन हर नीति में नियति कुछ और ही थी।हाथी के समान खाने के कुछ दिखाने के कुछ। बोरे बासी योजना के सम्बन्ध में सूचना के अधिकार के चलते जानकारी बाहर आई है ये अत्यंत ही बेशर्मी से जनता के दिए पैसे का दुरुपयोग का है। आठ करोड़ रुपए बिना नियमों के पालन किए “व्यापक” नाम की संस्था को परोस दिया गया। डोम से लेकर मेडल तक हर सामग्री में भ्रष्ट्राचार टपक रहा है। जिस समय का घोटाला है उस समय इस विभाग के सचिव पद पर ऐसा अधिकारी था जिसके बच्चों का लोक सेवा आयोग परीक्षा में चयन ही भ्रष्टाचार के जरिए हुआ है। ऐसे अधिकारी से नैतिकता की उम्मीद करना बेमानी है। मामले के खुलासे के बाद पिछली सरकार के राजनैतिक व्यक्तित्व तो बच कर निकल जाएंगे लेकिन सरकारी दस्तावेज में नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों की खैर नहीं है। विष्णु देव साय सरकार को पिछली सरकार के न केवल बोरे बासी योजना की जांच गंभीरता से करा कर दोषी अधिकारियों सहित इसके जरिए भ्रष्ट्राचार को पनपाने वाली व्यापक संस्था के कर्ता धर्ताओं के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही करने में पीछे नहीं रहना चाहिए
